मथुरा। जिंदगी जीने के लिए भौतिक सुख-सुविधाएं ही जरूरी नहीं बल्कि सादा जीवन, उच्च विचार में ही जिंदगी के असल मायने छिपे हैं। युवाओं को सादगी का पाठ पढ़ाने के लिए सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर एमोंगेस्ट यूथ संस्था के संस्थापक पद्मश्री डॉ. किरण सेठ 72 साल की उम्र में साइकिल यात्रा पर निकले हैं। जीएलए विश्वविद्यालय पहुंचकर उन्होंने विद्यार्थियों को महात्मा गांधी के विचार और सितार वादक पंडित निखिल बनर्जी के प्रयास और विचारों के बारे में जानकारी दी।
जीएलए विवि पहुंचने पर डॉ.सेठ का स्वागत बैडमिंटन कोच अमित शर्मा ने किया। प्रतिकुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने विद्यार्थियों को डॉ. सेठ का परिचय कराया। उन्होंने जीएलए विवि के विद्यार्थियों से बातचीत में कहा कि युवा भौतिक सुख-सुविधाओं को अधिक महत्व दे रहे हैं। लेकिन जिंदगी जीने के लिए बीएमडब्ल्यू और हवाई जहाज ही जरूरी नहीं हैं। जिंदगी का असल आनंद सादगी में है।
महात्मा गांधी ने भी सादा जीवन, उच्च विचार का मूलमंत्र दिया था। गांधी की सोच से प्रेरित होकर ही राजघाट से गांधी आश्रम तक साइकिल यात्रा कर रहा हूं। करीब 1500 किलोमीटर की यात्रा पूर्ण करते हुए मथुरा-वृंदावन के विभिन्न मार्गों से होते हुए समापन दिल्ली में ही करेंगे। प्रो. पंचानन मोहंती, प्रो. नितिन भटनागर, प्रो. ममता भटनागर आदि उपस्थित रहे। संवाद