मथुरा। रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव के चलते सरकारी गेेहूं खरीद में वर्ष २०२२ के दौरान रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। ९ लाख ३० हजार क्विंटल के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र १०२० क्विंटल ही सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीदा जा सका है। अब शासन ने गेहूं खरीद के लिए १५ दिन और बढ़ा दिए हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर ३० जून तक गेहूं खरीदा जा सकेगा। पहले यह तिथि १५ जून ही थी।
यूक्रेन को सोने का कटोरा कहा जाता है। वहां पर गेहूं की होने वाली पैदावार विश्व भर की मांग को पूरा करती है। विगत दिनों रूस के साथ चल रहे युद्ध ने यूक्रेन की पैदावार को शून्य पर ला दिया है। इससे भारत के गेहूं की डिमांड अनेक देशों में बढ़ गई। इसी स्थिति को देखते हुए प्राइवेट खरीदारों ने किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य से अधिक कीमत दी। इसके चलते ३० से अधिक सरकारी क्रय केंद्रोें में से मात्र ११ क्रय केंद्रों पर जनपद में किसानों के गेहूं की खरीद हो सकी।
इसमें भी महज १०२० क्विंटल गेहूं की खरीद की जा सकी है। जनपद को शासन से ९ लाख ३० हजार क्विंटल गेहूं खरीदने का लक्ष्य दिया था। एक अप्रैल से शुरू हुई गेहूं की खरीद १५ जून तक चली है । डिप्टी आरएमओ संतोष यादव ने बताया कि इस दफा लक्ष्य से काफी कम गेहूं खरीदा जा सका है। अभी हमारे पास १५ दिन और बाकी हैं। शासन की ओर से गेहूं खरीद के लिए ३० जून तक तारीख तय की है।