मथुरा। नगर निगम ने 15 दिसंबर से रैन बसेरे संचालित करने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद खराब है। बंगाली घाट स्थित रैन बसेरे पर बुधवार को ताला लटका था। वहीं, बीएन पोद्दार स्कूल के पास स्थित रैन बसेरे में कबाड़ भरा था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक दिन बाद कैसे तमाम व्यवस्थाएं मुकम्मल हो जाएंगी।
नगर निगम ने मथुरा-वृंदावन में 13 जगहों पर अस्थायी और स्थायी रैन बसेरे संचालित करने का दवा करते हुए इनमें शौचालय, रसोईघर, रजाई और गद्दों के अलावा हीटर व चाय की व्यवस्था करने का दावा किया है। तीर्थनगरी मथुरा-वृंदावन में हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन मंदिरों के दर्शन को आते हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जो होटल अथवा गेस्ट हाउस में ठहरने का सामर्थ्य नहीं रखते। ऐसे श्रद्धालु नगर निगम द्वारा बनवाए रैन बसेरों की खोज में इधर-उधर भटकते रहते हैं।
इस बार नगर निगम ने 5 स्थायी और 8 अस्थायी रैन बसेरे संचालित करने का दावा किया है, इन्हें 15 दिसंबर से शुरू करने की बात कही थी, लेकिन अब तक न तो कंबल-बिस्तर का इंतजाम और न ही सफाई करवाई गई है। नगर आयुक्त शशांक चौधरी के अनुसार सभी रैन बसेरों को दुरुस्त कराते हुए संचालित किया जाएगा। श्रद्धालुओं को कोई भी परेशानी नहीं होने दी जाएगी। अगर, किसी भी श्रद्धालु को समस्या हुई तो जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रैन बसेरे संचालित न होने के कारण सर्द रात में खुले आसमान के नीचे सोना पड़ रहा है। सरकार पैसा देती है तो अधिकारी समय से इंतजाम क्यों नहीं करते।- कमरुद्दीन
बंगाली घाट के रैन बसेरे पर ताला लटका है। ऐसे में सर्द रात में निराश्रितों को खुले में सोना पड़ रहा है। अधिकारियों को शीघ्र इंतजाम करने चाहिए। - केशव पंडित