मथुरा। छेड़खानी, दुष्कर्म जैसी संगीन कानूनी धाराओं का इस्तेमाल रंजिश निकालने में किया जा रहा है। जांच में पता चला है कि कोई खेत में कहासुनी की दुश्मनी में तो कोई गली में गाड़ी खड़ी करने को लेकर चल रही रंजिश का बदला लेने के लिए तो कोई बच्चों के झगड़े में दूसरे पक्ष को सबक सिखाने की नीयत से दुष्कर्म, छेड़खानी जैसे मुकदमे दर्ज करा रहा है। हैरानी की बात यह है कि कई लोग तो अपने परिवार की नाबालिग बच्चियों को भी विपक्षियों को फंसाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। बीते 11 माह में दर्ज दुष्कर्म, छेड़खानी जैसे मामलों की विवेचना के आधार पर यह सच्चाई सामने आई है।
जनपद के सभी थानों में जनवरी 2023 से नवंबर तक छेड़खानी के 207 मुकदमे दर्ज कराए गए। पुलिस ने जांच की तो 168 मामलों में आरोपों के संबंध में वादी पक्ष पर्याप्त साक्ष्य नहीं दे पाया। इस पर इन सभी में एफआर लगाई गई। इसके अलावा 5 मुकदमे वादी-प्रतिवादी में फैसला होने या वादी के आरोपों से मुकरने पर एक्सपंज यानी खत्म किए गए। महज 34 मुकदमों में ही पुलिस को छेड़खानी के संबंध में साक्ष्य मिले और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। इसी प्रकार दुष्कर्म के 60 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें 8 में एफआर लगी, 5 एक्सपंज हुए और 47 में चार्जशीट दाखिल की गई। पॉक्सो यानी नाबालिगों से दुष्कर्म/छेड़खानी के 176 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से 25 में एफआर लगी, 9 एक्सपंज हुए और 142 में चार्जशीट दाखिल की गई।
वैज्ञानिक साक्ष्य उगल रहे झूठे मुकदमों का सच
एसपी क्राइम अवनीश कुमार मिश्र ने बताया कि छेड़खानी, दुष्कर्म जैसे संगीन आरोप के प्रत्येक मुकदमे में तय किया गया है कि इनकी वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ भी पड़ताल की जाएगी। इसी क्रम में पुलिस दुष्कर्म के प्रत्येक मुकदमे में डीएनए टेस्ट करा रही है। इसमें आरोपी और पीड़िता के रक्त, कपड़े, बाल, नाखून, आरोपी के सीमन और पीड़िता के स्लाइड सैंपल लेकर एफएसएल भेजे जा रहे हैं। वैज्ञानिक साक्ष्यों की रिपोर्ट आने के बाद ही चार्जशीट दाखिल की जा रही है। इसका लाभ यह मिल रहा है कि निर्दोष जेल नहीं जा रहे हैं।
नार्को तक पहुंचाई जांच, खुला झूठ का राज
एसपी देहात त्रिगुण बिषेन ने बताया कि छाता थाने में दर्ज दुष्कर्म के एक मुकदमे में पुलिस ने नार्को टेस्ट तक कराया। पिछले माह ही रिपोर्ट आई, इसमें पीड़िता के आरोप झूठे पाए गए। मामला रंजिशन मुकदमा दर्ज कराने का निकला। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म की धारा हटाकर अन्य सुसंगत धाराओं में रिपोर्ट तैयार की।
एडीजी जोन आगरा द्वारा संचालित ऑपरेशन जागृति का यही उद्देश्य है कि महिला संबंधी कानूनों का कोई भी दुरुपयोग न करे। गांव, मोहल्ले, स्कूलों में जाकर लोगों को बताया जा रहा है कि झूठा मुकदमा दर्ज कराना भी कानूनन अपराध है। पुलिस तकनीक के साथ कदमताल करते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों के सहारे अपराधियों को सजा भी करा रही है और निर्दोषों को भी बचा रही है।
- शैलेश कुमार पांडेय, एसएसपी
आंकड़ों पर निगाह
आरोप मुकदमे अंतिम रिपोर्ट लगी एक्सपंज हुए चार्जशीट लगी
दुष्कर्म 60 08 05 47
पॉक्सो 176 25 09 142
छेड़खानी 207 168 05 34