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मथुरा: आज गोपाल रास रस खेलत, पुलिन कल्पतरू तीर री रजनी..

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मथुरा। वृंदावन में यमुना जी के किनारे स्थित अखिल भारतीय श्री पंच राधाबल्लवी निर्मोही अखाड़ा के ? - फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। वृंदावन कुंभ में यमुना जी के किनारे स्थित अखिल भारतीय श्रीपंच राधाबल्लभीय निर्मोही अखाड़ा के पंडाल परिसर में चल रहे नित्यलीला महोत्सव में महारास की अभिनव प्रस्तुति ने मन मोह लिया। श्रीमहंत लाड़िली शरण महाराज के सानिध्य में बड़ा रास मंडल गोविंद घाट की ओर से भगवान श्रीकृष्ण व उनकी अल्हादिनी शक्ति श्रीराधा जी की लीलाओं का मंचन किया जा रहा है।
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लीला मंच पर रासाचार्य देवेंद्र वशिष्ठ जी के निर्देशन में ब्रज के बाल कलाकारों ने मनमोहक चंद्रमा की धवल चांदनी की अनुभूति के बीच महारास की प्रस्तुति दी। आज गोपाल रास रस खेलत, पुलिन कल्पतरू तीर री सजनी... के बीच कलाकारों ने ब्रजभाषा में किए मंचन ने द्वापर युगीन याद ताजा कर दी। रासाचार्य देवेंद्र वशिष्ठ ने बताया कि जीव और ब्रह्मा का मिलन ही महारास है। माया रहित शुद्ध जीव को भगवान स्वयं से मिलने का निमंत्रण देते हैं। महारास में भगवान ने कामदेव को पराजित किया है। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में करीब 11 साल तक लीलाएं की हैं। महारास श्रीकृष्ण की लीलाओं में से एक है। गोपियों के प्रेम व तप के कारण प्रभु का आना पड़ा है। प्रत्येक गोपी के साथ अलग-अलग रूप धारण कर श्रीकृष्ण ने महाराज किया है। कुंभ मेला में प्रभु की लीलाओं का मंचन भावपूर्ण तरीके से किया गया है।
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