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मथुरा : चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा को देवीमय हुई कन्हैया की नगरी

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पूजा की थाल लेकर माता रानी की पूजा करने जाती महिलाएं भक्त।
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मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा को देवीमय हो गई। पूजा की थाली के साथ महिला और बच्चों की मंदिर जातीं टोलियाें ने नवरात्र के पहले दिन भक्ति का अद्भुत अहसास कराया।
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देवी मंदिरों में भक्तों की कतार लग गई। पूजन के दौरान मंदिरों में घंटे-घड़ियाल गूंजते रहे तो हवन कुंडों से उठती महक ने वातावरण को और भी सुगंधित बना दिया। इस दौरान मंदिर ही नहीं रास्ते भी देवी मैया की जयजयकार से गूंजते रहे।
शनिवार को नवरात्र की शुरूआत भक्तिभाव के साथ हो गई। मंदिर और घरों पर देवी के पूजन किए गए। देवी भक्तों ने विधिविधान पूर्वक कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योत जलाई। सभी लोगों ने सामूहिक रूप से घरों पर देवी पूजन किया।
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मंदिरों में देवी मां की पूजा-अर्चना के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। कैंट काली, कंकाली देवी, चामुंडा देवी, पथवारी देवी, कैला मैया मंदिर भैस बहोरा, महाविद्या देवी मंदिर, रंगेश्वर वाली देवी, भूतेश्वर महादेव मंदिर स्थित पाताल देवी आदि मंदिर पर भक्तों की कतार लग गईं। मंदिर परिसर मैया की जयजयकार से गूंजते रहे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस जुटी रही। सुबह पूजन के बाद शाम के वक्त मंदिरों में दर्शन करने वालों की कतार लग गईं।
मां मुरादें पूरी करदे हलवा बाटूंगी...
प्राचीन ठाकुर श्री केशव देव जी मंदिर में नव संवत्सर 2079 पर श्रीकृष्ण सामूहिक संकीर्तन मंडल के सदस्यों ने भजन प्रस्तुत किए। इसमें मनमोहन सराफ ने जोगन कब तक नैन छुपाएगी तेरे पीछे पड़ो लांगुरिया, विजय बंसल ने तूने मुझे बुलाया शेरावालिए, महेश गोयल ने मां मुरादें पूरी करदे हलवा बाटूंगी, महेश टेंट वालों ने छोटी सी किशोरी मेरे अंगना में डोले रे, किशन गोपाल सहित अनेक भक्तों ने ठाकुर जी के सम्मुख भजन गाए। मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया।
इससे पूर्व भगवान का सेवायतों ने पंचामृत अभिषेक किया गया। इस दौरान संस्थान अध्यक्ष पंडित सोहनलाल शर्मा, मीडिया प्रभारी नारायण प्रसाद शर्मा, बनवारी लाल,सुरेश अग्रवाल, गुड्डू बंसल, विजय अग्रवाल, गजेंद्र सराफ, कन्हैया लाल सुपारी वाले, सुरेश पत्तल, श्यामाचरण गोस्वामी आदि मौजूद रहे। संवाद
लट्ठों से होती है नरी-सेंमरी देवी की पूजा
छाता (मथुरा)। तहसील मुख्यालय से करीब ६ किलोमीटर की दूरी पर स्थित नरी-सेंमरी देवी मंदिर के साथ नवरात्र में पूजन की अद्भुत परंपरा जुड़ी हुई है। यहां नवमी के दिन देवी की पूजा लट्ठों से होती है जबकि तीज को चमत्कारिक आरती की ख्याति है जिसे आगरा के धांदू भगत के परिजन करते आ रहे हैं।
दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित गांव नरी सेमरी में देवी मां का मंदिर स्थापित है। इस मंदिर के साथ जुड़ी किवदंती के अनुसार आगरा निवासी धांदू भगत हिमाचल के नगरकोट कांगड़ा में विराजमान नगरकोट देवी के भक्त थे। वे देवी के दर्शन के लिए वर्षों तक आगरा से कांगड़ा गए। अधिक उम्र होने पर मैया ने वर मांगने को कहा तो उन्होंने देवी मां को आगरा चलने के लिए आमंत्रित किया।
इस आमंत्रण को देवी मां ने स्वीकार तो किया लेकिन रास्ते में कहीं भी भक्त धांदू से पीछे मुड़कर न देखने की शर्त रखी। छाता के निकट सेंमरी गांव में भक्त धांदू ने शक करते हुए पीछे मुड़कर देख लिया। उसी वक्त से देवी मां यहां विराजमान हो गई। आज भी धांदू भक्त के परिजन तीन को चमत्कारिक आरती करते हैं।
मंदिर के महंत नत्थी सिंह ने बताया कि नवमी के दिन यहां यदुवंशी लट्ठों से देवी का पूजन करते हैं। मान्यता है कि पूर्व में देवी के प्रसाद आदि को लेकर झगड़ा होता था। इसके चलते लट्ठ आदि हथियारों से रक्षा होने लगी जो परंपरा बन गई, जिसका निर्वहन आज भी भव्यता के साथ किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस बार तीज 4 अप्रैल को चमत्कारिक आरती और नवमी 10 अप्रैल को लट्ठ पूजा होगी।
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