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मथुरा: बेलवन में कान्हा के लिए महालक्ष्मी ने बनाई थी खिचड़ी

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मांट (मथुरा)। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण मांट के निकट यमुना किनारे वन बेलवन में रास रचाने आया करते थे। ऐसे ही एकबार भगवान ने वहां रास रचाकर बांसुरी बजाई तो उसकी आवाज देवलोक और स्वर्गलोक तक पहुंची।
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महालक्ष्मी ने नारद जी से पूछा कि यह आवाज कैसी है। नारद जी बोले कि बेलवन में यमुना किनारे भगवान श्रीकृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं। महालक्ष्मी बेलवन में आ गईं और रास में प्रवेश करना चाहा, पर वहां पर मौजूद गोपियों ने उन्हें रोक दिया। महालक्ष्मी ने गोपियों को भला-बुरा कह डाला तो भगवान को बुरा लगा।
उन्होंने महालक्ष्मी से कहा कि यह साधारण गोपियां नहीं हैं। इन गोपियों ने मेरे रास में शामिल होने के लिए हजारों वर्ष तपस्या कर रास में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त किया है। यदि महालक्ष्मी आपको रास में शामिल होना है तो पहले हजारों वर्ष तपस्या करनी होगी और गोपियों को प्रसन्न करना होगा।
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मान्यता है कि तभी से महालक्ष्मी जी यहां गोपी रूप में तपस्या कर लोगों की मनोकामना पूर्ण कर रही हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय इस वन में बेल की प्रचुरता के कारण इस स्थान को बेलवन कहा जाता है। बेलवन वृंदावन से मात्र दो किलोमीटर दूर है।
महालक्ष्मी मंदिर समिति के अध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि यहां महालक्ष्मी जी तपस्या कर रही हैं तो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण उनकी सेवा करते हुए महालक्ष्मी को खिचड़ी का प्रसाद खिला रहे हैं। इसी वजह से यहां पौष माह के प्रत्येक बृहस्पतिवार को मेले का आयोजन किया जाता है। प्रसाद रूप में महालक्ष्मी को खिचडी, रेबड़ी, गजक का प्रसाद का महत्व है। यहां हजारों श्रद्धालु मेले में खिचड़ी, गजक, रेबड़ी का प्रसाद महालक्ष्मी को अर्पित करते हैं और प्रसाद के रूप में खिचड़ी का भंडारा किया जाता है।
इस बार पहला मेला 23 दिसंबर (बृहस्पतिवार) को लगेगा। वहीं इस मेले में अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। जगह-जगह भंडारे का आयोजन किया जाता है। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए आधा दर्जन से अधिक थानों का पुलिस बल लगाया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मेले में सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इधर, वृंदावन से बेलवन के लिए जाने वाले मार्ग की हालत बहुत दयनीय है। यमुना पार करने के बाद बेलवन तक पहुंचने के लिए या तो पैदल जाना पड़ता है या नाव का सहारा लेना पड़ेगा।
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