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मथुरा: कान्हा के हुरियारों के स्वागत को तैयार राधा की नगरी

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मथुरा। कान्हा के हुरियारों के स्वागत के लिए नगाड़े को पेड़ पर सुखाते बरसानावासी। - फोटो : MATHURA
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बरसाना (मथुरा)। लठामार रंगीली होली में हुरियारिन बनने का सौभाग्य भले ही कस्बे की ब्राह्मण महिलाओं को ही मिलता हो, पर होली के दौरान आनंद उठाने से कोई नहीं चूकता है।
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कस्बे के हर वर्ग के लोग इस पर्व पर अपनी सहभागिता करते हैं। कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में रंगीली होली के दिन निकाली जाने चौपाई के लिए लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा है। युवा, बुजुर्गों से चौपाई गायन सीख रहे हैं। रंगीली होली पर हुरियारों के स्वागत के लिए कस्बे के हर मोहल्ले में चौपाई निकाली जाने की तैयारियां चल रही हैं।
नंदगांव से आने वाले हुरियारे कस्बे के प्रिया कुंड पर अपना पड़ाव करते हैं। प्रिया कुंड पड़ाव को प्रतीकात्मक जनवासा भी कहा जाता है। कस्बे के प्रमुख गणमान्य नागरिकों द्वारा प्रिया कुंड पर हुरियारों का स्वागत किया जाता है। यहां हुरियारों को भांग की ठंडाई पिलाई जाती है। यहां पर कस्बे के हर मोहल्ले के लोग अपने-अपने नगाड़े, ढोल, ढप, मंजीरा लेकर पहुंच जाते हैं। हर मोहल्ले की अपनी एक अलग ध्वजा होती है।
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नगाड़ों की थाप पर युवा थिरकते हैं तो बुजुर्ग होली के रसिया गाते हुए चलते हैं। कस्बे के चैना थोक, टांटिया मोहल्ला, बहबूदिया मोहल्ला, बाग मोहल्ला, वृषभानु जी मंदिर, बास मोहल्ला, तेहिया मोहल्ला, यादव मोहल्ला, श्रोत्रिय समाज व गोस्वामी समाज के लोगाें द्वारा चौपाई गायन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया जाता है। चौपाई गायक देवकीनंदन व राजवीर यादव का कहना है कि लठामार होली खेलने नंदगांव के हुरियारे आते हैं।
उनके स्वागत में नगाड़े के साथ होली की चौपाई गाते हुए प्रिया कुंड पर जाते हैं। लठामार होली बरसाना की केवल ब्राह्मण महिलाएं खेलती हैं। बरसाना के सातों समाज के लोग नंदगांव के हुरियारों का स्वागत करते हैं।
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