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मथुरा: रात को अधिकारी विहीन हो जाते हैं जिले के ब्लॉक और तहसील मुख्यालय

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मथुरा। सभी एसडीएम को तहसील मुख्यालय पर ही रात्रि विश्राम करने के आदेश हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह आदेश एक बार फिर दोहराया है लेकिन सीएम के आदेश को तीन दिन बीतने के बाद भी जिले में तहसील और विकास खंड कार्यालय रात होते ही अधिकारी विहीन हो जाते हैं।
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यहां तैनात अधिकारियों की गाड़ियां जिला मुख्यालय मथुरा की ओर दौड़ने लगती हैं। तहसील के अधिकांश अधिकारियों को जिला मुख्यालय पर सरकारी आवास आवंटित हैं।
मथुरा जनपद पांच तहसील और १० ब्लॉक में विभाजित है। इसमें महावन और गोवर्धन तहसील नवीन है जबकि मांट, छाता और सदर पुरानी तहसील हैं। नवीन और पुरानी व्यवस्था के तहत जिले की सभी तहसीलों पर मुख्यालय भवन मौजूद हैं लेकिन यहां अफसरों की रात को मौजूदगी नजर नहीं आती है।
जनपद की सबसे नई गोवर्धन तहसील है, यहां अब तक एसडीएम के लिए आवास की व्यवस्था नहीं हुई है। ऐसे में प्रत्येक दिन एसडीएम का मथुरा से ही आवागमन होता है।
इसी प्रकार महावन तहसील भी नई है। यहां का भवन भी नया है। आवास की व्यवस्था होने के बाद भी जिला मुख्यालय से सबसे कम दूरी पर होने के कारण यहां के एसडीएम और तहसीलदार का प्रत्येक दिन मथुरा से आना जाना होता है। मांट तहसील मुख्यालय भी रात को खाली हो जाता है। यहां के एसडीएम और तहसीलदार की गाड़ियां भी जिला मुख्यालय से ही प्रत्येक दिन आवागमन करती हैं लेकिन इन सभी के उलट जनपद की एक मात्र छाता तहसील में एसडीएम और तहसीलदार की मौजूदगी रात को भी रहती है। हालांकि आवास जिला मुख्यालय पर भी है।
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ब्लॉक मुख्यालय पर नजर डाले तो शाम होते ही जनपद के अधिकांश ब्लॉक कार्यालय खाली हो जाते हैं। नौहझील, बलदेव, छाता, नंदगांव, चौमुहां, फरह, राया ब्लॉक मुख्यालय भी शाम होते ही अधिकारी विहीन हो जाते हैं। गोवर्धन में खंड विकास अधिकारी की मौजूदगी रहती है।
अधिकारी-कर्मचारियों की मौजूदगी का होगा आकस्मिक निरीक्षण
मुख्य सचिव ने जिला मुख्यालय स्थित कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर निर्धारित समयावधि के कड़ाई से पालन करने के निर्देश डीएम को दिए हैं। कहा गया है कि अधीनस्थ अधिकारी एवं कर्मचारियों की कार्यालय में समय से तथा पूर्ण अवधि तक उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए समय समय पर आकस्मिक निरीक्षण भी किया जाए। समय से कार्यालय न पहुंचने वाले अधिकारी, कर्मचारी या मध्यान्ह भोजन उपरांत कार्यालय न पहुंचने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
खत्म हुई बायोमीट्रिक उपस्थिति
पूर्व प्रदेश सरकार ने सभी विभागीय कार्यालयों में कर्मचारियों की बायोमीट्रिक उपस्थिति के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए कलक्ट्रेट, राजीव भवन, विकास प्राधिकरण सहित सभी जिला कार्यालयों में बायोमीट्रिक मशीन लगाई गईं। यह व्यवस्था कुछ माह तो चली, लेकिन अब तो उक्त बायोमीट्रिक मशीन ही अधिकांश कार्यालयों से गायब हो चुकी हैं। उधर, जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने कहा कि सीएम के आदेशों का पालन किया जाएगा। सभी अधिकारियों को दिशा निर्देश दे दिए हैं।
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