मथुरा। छात्रवृत्ति घोटाले में फंसे विद्यालयों की जांच सोमवार को भी पूरी नहीं हो सकी। जांचकर्ताओं द्वारा अभी भी करीब एक सैकड़ा विद्यालय संचालकों से संपर्क साधकर जांच की कार्रवाई पूरी की जा रही है, जबकि उनके द्वारा करीब 314 विद्यालयों में से दो सौ विद्यालयों की जांच कर समाज कल्याण विभाग को सौंप दी है। जानकारी रहे करीब 330 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच शासन ने आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी है।
बिना छात्रों के ही छात्रवृत्ति निकलने संबंधी छात्रवृत्ति घोटाले की जांच वर्तमान में तहसीलवार जांच समिति द्वारा की जा रही है। 22 जुलाई को जांचकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण कार्यालय को सौंपनी थी लेकिन अधिकारी जांच पूरी नहीं कर सके। मात्र छाता तहसील ने ही जांच रिपोर्ट सौंपी।
मांट की जांच रिपोर्ट नहीं मिल सकी है। जबकि गोवर्धन, महावन, मथुरा की जांच रिपोर्ट नहीं आ सकी है। उक्त अधिकारियों ने पूरे विद्यालयों की जांच नहीं सौंपी है। जिसके चलते चार तहसीलों की मिलाकर कुल एक सैकड़ा विद्यालयों की जांच रिपोर्ट और आनी है। सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि अभी तक जांच रिपोर्ट पूरी नहीं आ सकी हैं। जांच पूरी होते ही उसे शासन को भेजा जाएगा।
गड़बड़ी की आशंका
जांच में गड़बड़ी की आशंका को लेकर समाज कल्याण विभाग पूरी तरह से सतर्क है। कर्मचारी से लेकर अधिकारियों तक इस मामले की गंभीरता को समझते हुए पूर्व में एसडीएम स्तर से की गई जांच से अलग आ रहीं रिपोर्ट को लेकर सजग हैं। उनका कहना है कि छात्रवृत्ति से संबंधी मामले की जांच की जांच भी कभी हो सकती है।