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Mathura News: भगवान जगन्नाथ हुए बीमार

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ज्ञानगुदड़ी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर में अभिषेक करते स्वामी ज्ञानप्रकाश पुरी महाराज।
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वृंदावन। जगन्नाथ मंदिर में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को 108 कलशों से भगवान जगन्नाथ और उनके अग्रज बलभद्र एवं उनकी बहन सुभद्रा का अभिषेक किया। इस परंपरिक जलयात्रा के साथ ही भगवान जगन्नाथ बीमार हो गए। मंदिर के पट भक्तों के लिए 16 दिन के लिए बंद हो गए। इस बीच सेवायत द्वारा उनका पूजन एवं काढा और औषधियों से सेवित किया जाएगा। 16 जुलाई को ठाकुरजी के पट खुलेंगे और रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे।
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सोमवार को ज्ञानगुदड़ी स्थित जगन्नाथ मंदिर में जलयात्रा उत्सव मनाया गया। इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज बलभद्र और बहन सुभद्रा को ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी और अत्यधिक ताप से शीतलता व राहत प्रदान करने के लिए पारंपरिक रूप से दिव्य स्नान कराया। इस पारंपरिक उत्सव के दौरान गर्भगृह में विराजमान ठाकुरजी का 108 कलशों से विशेष महा अभिषेक किया। मंदिर के महंत स्वामी ज्ञानप्रकाश ने बताया कि ज्येष्ठ मास के तपते मौसम में भगवान को शीतलता पहुंचाने के उद्देश्य से इस उत्सव की परंपरा सदियों से चली आ रही है। पवित्र जलयात्रा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। महा अभिषेक के लिए विशेष रूप से 108 कलशों की व्यवस्था की गई है। इन कलशों में देश की सात प्रमुख और पवित्र नदियों का जल, विभिन्न प्रकार के ऋतु फलों का ताजा रस एवं औषधीय जड़ी-बूटियों से युक्त जल भरा गया। इसी वैदिक और औषधीय जल से भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा का मंत्रोच्चारण के बीच अभिषेक किया गया।
जल से निरंतर भारी स्नान करने के कारण ठाकुरजी अत्यधिक स्नान के कारण अस्वस्थ्य हो जाते हैं। उन्हें तेज ज्वर आ गया है। बीमार होने के कारण ठाकुरजी तुरंत एकांतवास में चले गए। इस अस्वस्थता की अवधि के दौरान मंदिर की पूरी दिनचर्या और व्यवस्था बदल जाती है। भगवान के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उनके नियमित भोग-प्रसाद में भी बड़ा बदलाव किया जाएगा। उन्हें काढा और औषधि सेवा की जाएगी। इस काल में ठाकुर जी को उनका सबसे प्रिय महाप्रसाद अर्पित नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर उन्हें केवल हल्का और सूखा भोग ही निवेदित किया जाएगा। हालांकि इस पूरे समय के दौरान मंदिर के गर्भगृह के भीतर ठाकुर जी की गुप्त सेवा-पूजा और उपचार की पद्धतियां निरंतर जारी रहेंगी। ज्वर के कारण एकांतवास में जाने की वजह से ठाकुर जी कई दिनों तक अपने भक्तों को दर्शन नहीं देंगे। 16 दिन के बाद 16 जुलाई को मंदिर के पट खुलेंगे। उसके बाद ठाकुरजी की विशेष पूजन होने के बाद नगर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी।
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