मथुरा। हत्या के उद्देश्य से 13 वर्षीय बच्चे का अपहरण करने वाले दोषी को को एडीजे (एफटीसी द्वितीय) सुशील कुमार ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अपहरण में शामिल पांच दोषियों को अदालत पूर्व में आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है।
21 अक्तूबर 2006 की सुबह चौमुहां निवासी मोहर सिंह का 13 वर्षीय बेटा सतीश घर से बाजार गया था। उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला था। सतीश ने बेटे के अपहरण की रिपोर्ट अपनी बहन भूदेवी के देवर पोहपी सहित कई लोगों के खिलाफ रिपोर्टिंग पुलिस चौकी जैंत (अब थाना जैंत) में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में लिखाया गया कि पोहपी उसकी जमीन को बिकवाना चाहता था। उसने जब जमीन बेचने से मना किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी थी।
पुलिस बच्चे की तलाश में जुट गई। इसी बीच 10 नवंबर 2006 को बुलंदशहर के नरसेना थाने की पुलिस ने मुठभेड़ के बाद कुछ बदमाशों को पकड़ा, जिनके कब्जे से अपहृत सतीश को बरामद किया था। बुलंदशहर पुलिस ने अपहृत सतीश को जैंत पुलिस को सौंप दिया। अपहरण में शामिल पोहपी, रमेश उर्फ छोटे, पदम सिंह, रहीस व पूरन सिंह को अदालत ने वर्ष 2011 में आजीवन कारावास की सजा सुना दी थी।
इस मामले में छाता के नौगांव निवासी नारायण फरार चल रहा था। अदालत ने उसकी पत्रावली को पृथक कर दिया। पुलिस ने नारायण को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। इसके बाद नारायण की पत्रावली पर सुनवाई शुरू हुई। अदालत ने नारायण को बच्चे के अपहरण का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। निर्णय सुनाए जाने के बाद अदालत ने उसका सजाई वारंट बना उसे सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया है।