मथुरा। परिषदीय विद्यालयों के गुरुजी राष्ट्रभाषा हिंदी और अंग्रेजी के कक्षा आठ तक के स्तर की व्याकरण, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान की परीक्षा में फेल हो गए। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) की परीक्षा के लिए 114 शिक्षकों ने आवेदन किया था, जिसमें 88 शिक्षकों ने परीक्षा दी और सिर्फ 44 ही अपनी योग्यता सिद्ध कर सके।
बेेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षा का स्तर उठाने के लिए नए नए प्रयोग किए जा रहे हैं। विभाग में शिक्षकों को एआरपी की भी जिम्मेदारी दी जाती है। हर ब्लाॅक में एआरपी पद पर विज्ञान, गणित, हिंदी, अंग्रेजी व सामाजिक विज्ञान विषय पर एक एक शिक्षक को जिम्मेदारी दी जाती है। ये एआरपी स्कूल समय में अलग-अलग स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं। नियम के अनुसार हर तीन वर्ष बार एआरपी पद के लिए परीक्षा होती है।
जिले में 10 ब्लाॅक और जिला मुख्यालय को मिलाकर कुल 55 एआरपी रखे जाते हैं। दो एआरपी नगर क्षेत्र में पहले से ही तैनात हैं। ऐसे में 53 पदों के लिए परीक्षा आयोजित हुई थी। प्रश्नपत्र जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान तथा राजकीय इंटर कॉलेज के शिक्षकों ने तैयार किया था और उत्तर पुस्तिकाएं भी उन्होंने ही जांची। संवाद
माइक्रो टीचिंग के बाद होगी नियुक्ति
बीएसए सुनील दत्त के अनुसार एआरपी पद के लिए लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले शिक्षकों को अभी दायित्व नहीं मिलेगा। अब उनसे स्कूलों में माइक्रो टीचिंग कराई जाएगी और उसे विषय विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा परखा जाएगा। इसके बाद साक्षात्कार होगा और फिर शिक्षक की नियुक्ति होगी।
बोले अभिभावक
जब शिक्षक ही कक्षा आठवीं तक के स्तर की परीक्षा पास नहीं कर पा रहे तो वे बच्चों को क्या पढ़ाएंगे। यही कारण है कि परिषदीय स्कूलों से अभिभावकों का मोहभंग हो रहा है।
- विनोद पाठक, अभिभावक
बेसिक शिक्षा विभाग के साथ ही प्रशासन को भी परिषदीय स्कूलों में इस दयनीय स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत है। जो शिक्षक फेल हुए हैं, उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर मौका मिले। ऐसी स्थिति में शिक्षकों का पढ़ाना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने सरीखा है।
- साधना पाठक, अभिभावक