मथुरा में गोवंश के अवशेष मिलने के बाद गोरक्षकों द्वारा विरोध और फिर पुलिस द्वारा उन पर हुआ लाठीचार्ज का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नाराजगी जताई है।
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वृंदावन में गोरक्षक कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज और उन पर की गई कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि मृत गोवंश को देखकर गोभक्तों का आक्रोशित होना स्वाभाविक है।
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ग्वालियर से उनके द्वारा जारी किए गए वीडियो में शंकराचार्य ने कहा कि जंगल में एक ही स्थान पर गायों को मरा देखकर पहुंचे गोभक्त आक्रोशित हुए। गाय कहां से आईं और उनकी पहचान कर तत्काल कार्रवाई की मांग के लिए गोभक्तों ने मार्ग पर जाम कर प्रदर्शन किया।
गायों के कानोंं पर टैग लगे होने से उनकी पहचान करने में कोई समस्या नहीं थी। जिले के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन गोभक्तों की बात सुनने की बजाय उनके ऊपर लाठीचार्ज कर दिया। इसमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। दिव्यांग गोभक्तों को भी चोट आई है। गायों के लिए समर्पण भाव से कार्य करने वाले गोभक्तों की जिज्ञासा शांत करने की बजाय पुलिस ने उन्हें थानों में बंद कर दिया।
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शंकराचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग को भी इस संबंध में सूचना दी गई, लेकिन आयोग की तरफ से भी ऐसा कोई उत्तर नहीं आया है, जिसे सबको संतोष हो। इससे सभी को निराशा और हताशा हो रही है। क्षोभ और आक्रोश भी है।
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की बात कही है। कहा कि गोभक्तों के आक्रोश को अपराध की दृष्टि से न देखा जाए। एक ही स्थान पर कई मृत गोवंश को देखकर आक्रोशित होना स्वाभाविक है। प्रशासन सहज आक्रोश समझकर पकड़े गए गोभक्तों को छोड़े। इस मामले में जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करे।