जाव के बाद बुधवार को बठैन में हुरंगा हुआ। बठैन की हुरियारिनों ने जाव के हुरियारों पर जमकर लाठियां बरसाईं। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने अलौकिक होली आयोजन का आनंद लिया। अबीर गुलाल की वर्षा के बीच कृष्ण-बलराम की जय-जयकार गूंजती रही।
अपराह्न करीब तीन बजे जाव के हुरियारे बलराम की प्रतीक झंडी को लेकर गांव के दाऊजी मंदिर पर एकत्रित हुए। मंदिर में समाज गायन के बाद हुरियारे ढोल-नगाड़े, ढप-ढोल बजाते, होली गीत गाते हुए मैदान की ओर चल दिए।
शोभायात्रा शाम सात बजे गांव के बाहर मैदान पर पहुंची। जहां घूंघट ओढ़े और हाथों में लाठियां लिए हुरियारिन खड़ी हुई थी। उन्होंने बरसाने की लठामार होली की भांति लाठियों से हुरियारों के लकड़ी के विशेष प्रकार से बने हलों पर वार पर वार किया।
35 फीट व्यास के गोल घेरे में हुरियारे भागते हुए हुरियारिनों की लाठियों के प्रहार से बचने का प्रयास करते। करीब एक घंटे से अधिक समय तक हुरंगा चला। बलदाऊ की जय, राधा रानी के जयघोष से मैदान गुंजायमान रहा।
हुक्केे बने आकर्षण का केंद्र
बठैन में हुरंगे के दौरान निकाली गई शोभायात्रा में सिरदारी के हाथों में लगे हुक्के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। थोडी दूर चलने पर बुजुर्गों का दल रुकता और हुक्का गुड़गुड़ाने लग जाता। बुजुर्गों के रुकते ही गांव की बुजुर्ग महिलाएं माला पहनाकर स्वागत करतीं और बुजुर्ग एक विशेष प्रकार के बने प्रसाद को निकालकर दे रहे थे। सिरदारी इस दौरान ठिठोली भी कर रही थी।