मथुरा। अंग्रेजी दवाओं के साथ ही लोग अब होम्योपैथिक इलाज पर भी भरोसा जताने लगे हैं। इसका अंदाजा जिला अस्पताल में होम्योपैथिक इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या को देखकर लगाया जा सकता है।
होम्योपैथिक ओपीडी में वायरल फीवर, जुकाम, खांसी, गले में खराश, जोड़ों में दर्द के मरीजों की भीड़ लग रही है। होम्योपैथी के विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी बीमारियों में होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति बेहद कारगर है। होम्योपैथी चिकित्सक डॉ सुखवीर सिंह ने बताया कि बदलते मौसम में लक्षणों के आधार पर अलग-अलग रोगों में होम्योपैथी की ऐकोनाइट, आर्सेनिक, एलियम सीपा, ब्रायोनिया, बेलाडोना, एपीटोरिम पर्फ, रस टॉक्स, जेल्सीमियम, काली बाइ इत्यादि दवाएं प्रमुख तौर पर दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि ओपीडी में रोजाना 130-150 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।
इस पद्धति के जरिये मरीजों को न सिर्फ बार-बार होने वाले संक्रमण से मुक्ति मिल रही है, बल्कि इसके साइड इफेक्ट्स भी कम हैं। चिकित्सक ने बताया कि वायरल बुखार तीन दिन से एक सप्ताह की दवाई में पूरी तरह सही हो जाता है। इससे कोई नुकसान भी नहीं होता है। उन्हाेंने बताया कि पिछले दिनों से ओपीडी में 20 प्रतिशत मरीज बढ़े हैं। संवाद