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Mathura News: श्रीलंका के मेहमानों ने किया ग्रामीण संस्कृति का अनुभव

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जैंत में मिट्टी के दीपक बनाने का प्रयास करती श्रीलंकाई प्रतिनिधि मंडल की सदस्य। - फोटो : mathura
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चौमुहां (मथुरा)। गांव जैंत में श्रीलंका से आए चार मेहमानों के एक दल ने भारतीय ग्रामीण संस्कृति और ब्रज की परंपराओं को नजदीक से जाना। ग्रामीण पर्यटन परियोजना के तहत आयोजित इस दौरे में मेहमानों ने ग्रामीणों के साथ भजनों पर नृत्य किया।
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सीलोन चैंबर ऑफ रीजेनरेटिव टूरिज्म के निदेशक नमल जयसेकरा ने बताया कि जैंत की आत्मीयता और ग्रामीण पर्यटन की विशेषताएं विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि यह अनुभव न केवल ग्रामीण जीवन से जोड़ता है बल्कि भारत की सांस्कृतिक जड़ों को भी समझने में मदद करता है। मेहमानों ने पौराणिक जयकुंड और कालिया मर्दन नाग मंदिर का दौरा कर पूजा-अर्चना की। स्टोरी-टेलर रितेश गौतम ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की कथा सुनाई। दल ने मिट्टी के बर्तन बनाने और कंठी-माला निर्माण की प्रक्रिया को भी देखा और तुलसी की खेती का अवलोकन किया। चार सदस्यीय दल में निर्मला रणसिंघे (जापान की यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर), नमल जयसेकरा, समन्वयक वजीरा राजपक्षे और समादी राजपक्षे शामिल रहे।
पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ग्रामीण पर्यटन सिर्फ यात्रा का साधन नहीं है। यह हमारे गांवों के लिए रोजगार का सृजन करने, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण करने और दुनिया भर के पर्यटकों का स्वागत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। जैंत ने उदाहरण पेश किया है कि भारत के गांव न केवल अपनी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रख सकते हैं, बल्कि वैश्विक पर्यटन आकर्षण के केंद्र भी बन सकते हैं।
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