मथुरा। कान्हा की नगरी में बिजली व्यवस्था सुधारने का नाम नहीं ले रही है। लगता है जैसे शासन से तीन वित्तीय वर्षों में मिले 328 करोड़ 92 लाख रुपये की धनराशि को करंट ने झुलसा दिया है। यही कारण है कि इतनी बड़ी धनराशि से निरंतर सुधार कार्य कराने के बावजूद जिले के उपभोक्ताओं को कटौती और फाल्ट से राहत नहीं मिल पा रही है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लि. के दक्षिणाांचल विद्युत वितरण निगम लि. ने वर्ष 2024 में मथुरा को जोन का दर्जा दिया, इसके बाद से यहां बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए शासन से सीधे बजट मिलने का रास्ता आसान हुआ। यहां बिजनेस प्लान के तहत बिजली लाइनों की मरम्मत, सब स्टेशनों और अन्य ढांचे को मजबूत करने पर धनराशि खर्च की गई।
बिजनेस प्लान के तहत जनपद को वर्ष 2024-25 से 2026-27 तक कुल में 328 करोड़ 92 लाख की धनराशि मिली। इस धनराशि से जिले में छह सब स्टेशन बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि छह अन्य निर्माणाधीन हैं। पुराने विद्युत ढांचे को मजबूत करने के साथ नई लाइन और अन्य कार्य भी कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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विद्युत सुधार के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। पिछले सालों की तुलना में बिजली आपूर्ति और फाल्ट की समस्या कम हुई है। साथ ही फाल्ट होने पर आपूर्ति शुरू होने वाला समय कम हुआ है। -राजीव गर्ग, मुख्य अभियंता
उपभोक्ता बढ़े
जिले में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या वर्ष 2024 में 5.17 लाख से बढ़कर वर्ष 2026 में 5.48 लाख हो गई है। करीब 31 हजार नए उपभोक्ता जुड़ने के साथ बिजली की मांग बढ़ी है। ऐसे में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना निगम के सामने बड़ी चुनौती है।
फाल्ट पर घंटों इंतजार
लाइन में खराबी या ट्रांसफार्मर में तकनीकी समस्या आने पर कई क्षेत्रों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इससे घरेलू कामकाज, कारोबार और छोटे उद्योग प्रभावित होते हैं। इतना बड़ी राशि खर्च होने पर फाल्ट-कटौती की समस्या से राहत मिलनी चाहिए।
इतनी मिली धनराशि
2024-25-148 करोड़ रुपये
पार्ट-द्वितीय-13.92 करोड़ रुपये
2025-26-61 करोड़ रुपये
2026-27-106 करोड़ रुपये
कुल-328.92 करोड़ रुपये
बढ़ते गए उपभोक्ता
2024-5.17 लाख
2025-5.20 लाख
2026-5.48 लाख