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Mathura News: रिकॉर्ड में गड़बड़ी...भवन एक-आईडी अनेक

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मथुरा। जीआईएस सर्वे के बाद नगर निगम के कर रिकॉर्ड में सामने आईं गड़बड़ियां भवन स्वामियों के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं। शहर में 500 से अधिक भवनों की डबल और ट्रिपल आईडी बन गईं हैं। इससे भवन स्वामियों को गृहकर जमा कराने में परेशानी आ रही है। लोग एक आईडी पर कर जमा करने पहुंच रहे हैं तो दूसरी आईडी पर बकाया दिखाई दे रहा है। एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) के तहत कर जमा करने के दौरान रिकॉर्ड की यह विसंगति सामने आ रही हैं।
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नगर निगम ने वर्ष 2019 में मथुरा-वृंदावन में जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) सर्वे कराया था। इसके तहत तीन लाख से अधिक भवन और प्लॉट चिह्नित किए गए। इनमें करीब 2.19 लाख भवन और लगभग 81 हजार खाली प्लॉट शामिल हैं। वर्ष 2021 में नगर निगम ने जीआईएस सर्वे आधारित व्यवस्था लागू की। इसके बाद से इसी व्यवस्था के आधार पर गृहकर की वसूली की जा रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में करीब एक लाख लोगों ने गृहकर जमा किया था।
जीआईएस सर्वे के दौरान कुछ मामलों में एक ही भवन के दो दरवाजे होने पर उसे अलग-अलग भवन के रूप में दर्ज कर लिया गया। इससे एक ही संपत्ति की दो या तीन आईडी बन गईं। अब गृहकर जमा करने के दौरान इन प्रविष्टियों के कारण रिकॉर्ड में बकाया दिखाई देने की समस्या सामने आ रही है। हालांकि अधिकारी इन विसंगति को दुरुस्त करा रहे हैं।
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ओटीएस में अब तक दो करोड़ रुपये जमा

नगर निगम की एकमुश्त समाधान योजना के तहत 15 अगस्त से भवन स्वामियों के आवेदन लिए जा रहे हैं। योजना 15 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान पुराने बकायेदार गृहकर जमा कराने पहुंच रहे हैं। अब तक 1,680 भवन स्वामी इस योजना का लाभ ले चुके हैं। इससे दो करोड़ रुपये गृहकर जमा हुआ है, जबकि 64.52 लाख रुपये की ब्याज माफी दी गई है।


इस साल 50 करोड़ का लक्ष्य

नगर निगम साल-दर-साल संपत्तिकर का लक्ष्य बढ़ा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में 44 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया था। इस बार 50 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है। निगम के जिम्मेदारों ने ओटीएस योजना के तहत कर जमा कराने का सिलसिला शुरू कर दिया है।


-जीआईएस सर्वे के दौरान कुछ भवनों की एक से अधिक आईडी बनने की शिकायतें हैं। इनके रिकॉर्ड का मिलान कर एकमुश्त समाधान योजना में नियमानुसार सुधार किया कर जा रहा है। जांच करवाकर पुरानी आईडी खत्म कराई जा रही हैं। बकायेदार ओटीएस योजना का लाभ लें। - अरविंद कुमार, मुख्य कर निर्धारण प्रभारी अधिकारी
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