275 करोड़ की जिला योजना कागजी बनकर रह गई। पूरा साल बीत गया, लेकिन पैसा केवल 71 करोड़ ही मिल पाया। धनाराशि न मिल पाने के चलते विकास की तमाम योजनाओं में दम तोड़ दिया। कई विभाग तो ऐसे हैं जिन्हें अभी तक फूटी कौड़ी नहीं मिल पाई है। वित्तीय वर्ष समाप्त हो रहा है, लेकिन अधिकारी बजट के लिए शासन स्तर पर पैरवी नहीं कर पाए।
इस बार जिला योजना सितंबर माह में तैयार हुई थी। सभी विभागों ने अपने-अपने कार्यों को शामिल करते हुए बजट की मांग की थी। लेकिन छह महीने के बाद भी बजट मिल नहीं पाया है। इसमें अफसरों की भी लापरवाही मानी जा रही है।
यदि अधिकारियों ने शुरुआत से ही प्रयास किए होते तो आज यह स्थिति नहीं होती। अब तो बजट मिलने की उम्मीद भी नहीं है। मत्स्य विभाग, नेडा, कृषि वानिकी, प्रोवेशन विभाग आदि को फूटी कौड़ी नहीं मिली है। मुख्य विकास अधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि शासन से जो पैसा विभागों को मिला था वह खर्च कर लिया गया है।
प्रमुख विभाग, प्रस्तावित धनराशि, मिली धनराशि, खर्च की गई धनराशि
कृषि विभाग 30 लाख 28 लाख 22 लाख
लघु सिंचाई 720 लाख 209 लाख 197 लाख
पशु पालन 408.78 46.38 लाख 20.90 लाख
वन विभाग 557 लाख 197.38 लाख 70.21 लाख
ग्राम्य विकास 283.47 लाख 164.23 लाख 129.3 लाख
रोजगार कार्यक्रम
ग्राम्य विकास 2127 लाख 1988 लाख 1988 लाख
पंचायती राज 1184 लाख 607 लाख 595 लाख
लघु सिंचाई निजी 1688 लाख 163.4 लाख 133.28 लाख
माध्यमिक शिक्षा 909.50 लाख 506 लाख 292.90 लाख
ग्रामीण स्वच्छता कार्य पंचायत 2500 लाख 750 लाख 750 लाख
आवास 2367 लाख 1824 लाख 1362 लाख
महिला एवं बाल विकास 470 लाख 413 लाख 413 लाख
विकलांग कल्याण 45.39 लाख 34.05 लाख 34.05 लाख
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निकायों को मिले 1.76 करोड़
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2016-17 का शुक्रवार को अंतिम दिन है। इससे दो दिन पहले राज्य सरकार ने स्टांप शुल्क से प्राप्त राशि का दो प्रतिशत निकायों को जारी कर दिया है। इसमें जिले को 1.76 करोड़ रुपये मिले हैं।
इसमें भी सबसे अधिक राशि मथुरा नगर पालिका के हिस्से 1.41 करोड़ आई है। इसके अलावा कोसीकलां को चार लाख, वृंदावन को 20.90 लाख, राधाकुंड को 2.89 लाख, गोवर्धन को 4.36 लाख, छाता को एक लाख मिले हैं। इनके अलावा बरसाना, चौमुंहा, फरह, नंदगांव को भी बजट मिला है।
रजिस्ट्री आफिस में उमड़ी भीड़
वित्तीय वर्ष 2016-17 खत्म होने से पहले रजिस्ट्री कार्यालय में भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में लोगों ने जमीन की खरीद और बिक्री की। कहा जा रहा है कि नवरात्र को शुभ मानते हुए लोग जमीन और भवनों की खरीद कर रहे हैं। राजस्व की दृष्टि से रजिस्ट्री विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 बहुत गिरावट वाला रहा है।
पिछले सालों की तुलना में जमीन की खरीद और बिक्री में बड़ी गिरावट आई है। इस मामले में टॉप टेन में रहने वाला मथुरा जनपद अब प्रदेश के सबसे अधिक फिसड्डी जिलों में शामिल हो गया है। लेकिन, नवरात्र शुरू होने के बाद रजिस्ट्री कार्यालय में भीड़ नजर आ रही है।