फरह की फराह देवी जन-जन की आस्था का केंद्र हैं। मान्यता है कि देवी मां ने पत्थर में प्रकट होकर धांधू भगत को दर्शन दिए और फलाहार कराया था। तभी से यहां फराह देवी के नाम से भव्य मंदिर है और देवी मां की पूजा भक्त करते चले आ रहे हैं।
फरह कस्बा स्थित फराह देवी मंदिर के संरक्षक लखनलाल बताते हैं कि आगरा के देवी भक्त धांधू आगरा से पैदल नरी-सेमरी देवी के दर्शन करने जाते थे। रास्ते में फरह में भूख लगने पर रुके लेकिन उनकी जिद थी कि वे बिना देवी के दर्शन किए फलाहार नहीं करेंगे। इस पर फरह कस्बा में एक पत्थर से देवी प्रकट हुई और धांधू भगत को दर्शन दिए। उन्हें फलाहार कराया।
इसके बाद उसी स्थान पर देवी मां की स्थापना की गई और 1897 में मंदिर बनाया। देवी को फराह देवी नाम दिया गया। तब से यह मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र है। फरह में रहने वाले अपनी संपन्नता के लिए देवी की ही पूजा करते हैं। यहां आसपास के गांवों में भैंस की पहली धार फराह देवी के नाम से निकाली जाती है और सबसे पहले दूध देवी को चढ़ाया जाता है। नवरात्र में फराह देवी मंदिर पर विशेष पूजा अर्चना होती है और मेला लगता है।