मथुरा। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया को स्वयं सिद्धि मुहूर्त कहा जाता है। अबूझ मुहूर्त होने की वजह से इस दिन कोई भी शुभ काम करने के लिए निश्चित शुभ मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है और मांगलिक कार्यों के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
ज्योतिषाचार्य कामेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि इस वर्ष अक्षय तृतीया के मौके पर कई महत्वपूर्ण और शुभ योगों का संयोग भी बन रहा है, जो इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ाने का काम करेगा। 14 मई को अक्षय तृतीया पर लक्ष्मी नारायण योग, सर्वार्थ सिद्धि योग गजकेसरी योग बन रहा है। कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन यदि जप, तप, स्नान दान आदि किया जाए तो इससे व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है।
इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन यदि अपने पितरों को जल दान दिया जाए तो कहा जाता है कि उनकी आत्मा अनंत काल के लिए तृप्त होती है। उन्होंने बताया कि हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा उच्च भाव में रहेंगे। अक्षय तृतीया के मौके पर गंगा, यमुना स्नान का भी महत्व बताया गया है।