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जिला प्रशासन और सत्याग्रही फिर आमने-सामने

Wed, 25 May 2016 11:46 PM IST
अमर उजाला मथुरा
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जिला प्रशासन और सत्याग्रही फिर आमने-सामने - फोटो : अमर उजाला
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जवाहर बाग प्रकरण में एक बार फिर जिला प्रशासन और कब्जा कथित सत्याग्रही आमने-सामने आ गए। तिरपाल लगाने को लेकर पैदा हुई स्थिति के बाद बुधवार को दोनों पक्षों ने जमकर शक्ति प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में कब्जाधारी लाठी-डंडे लेकर तैनात रहे तो फोर्स ने भी दो-दो हाथ करने की तैयारी कर ली थी। अधिकारियों की मौजूदगी में तनातनी देर रात तक होती रही। एक बार को लगने लगा कि आज एक्शन होकर ही रहेगा लेकिन इस दौरान मथुरा पहुंचे डीआईजी अधीनस्थों को दिशा निर्देश देकर लौट आए। आदेश न मिलने चलते फोर्स एक्शन नहीं ले सका। 
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जवाहर बाग की सरकारी जमीन से कब्जा हटाना प्रशासन के लिए नासूर बन चुका है। जवाहर बाग के नाम पर रिहर्सल तो रोज हो रहे हैं लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हो पाई है। यही कारण है कि कब्जाधारी भी इसे घुड़की की तरह ले रहे हैं। हजारों के संख्या में बाग पर अवैध कब्जा जमाए लोग प्रशासन को आंख दिखाने से जरा भी नहीं कतराते हैं। बुधवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ।  

दोपहर के एक बजे अचानक जवाहर बाग के कब्जाधारियों ने एसपी सिटी कार्यालय के पास खाली जगह पर तंबू लगाने का प्रयास किया। वहां तैनात पीएसी के जवानों ने उन्हें रोका तो कब्जाधारी अभद्रता पर उतर आए। इस पर पीएसी के जवानों ने तिरपाल वहां से हटा दिया और पास ही बने कृषि विभाग के लेखपाल के भैंस के तवेला पर इकट्ठा हो गए। 
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इस पर अवैध कब्जाधारकों ने सीटी बजाकर संकेत दिया और देखते ही देखते लाठी-डंडों से लैस करीब 700 लोग मौके पर आ गए। इनमें महिलाओं, लड़कियों और किशोरों की संख्या काफी थी। हालात बिगड़ते इससे पहले पीएसी के जवानों ने हेलमेट-बॉडी प्रोटेक्टर पहने और हथियारों के साथ कार्रवाई के लिए तैयार हो गए। सूचना पर पलक झपकते ही एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी, सीओ रिफाइनरी कुंवर अनुपम सिंह, सीओ सिटी चक्र पाणि त्रिपाठी, एसओ सदर, कोतवाली, गोविंदनगर और हाईवे थानाध्यक्ष पहुंचे और जवानों का नेतृत्व किया। आठ कंपनी पीएसी और पुलिस के जवान कार्रवाई के लिए तैयार थे। आंसू गैस की गन और राइफल लोड कर ली गईं। सूचना मिली कि डीआईजी अजय मोहन शर्मा भी मथुरा पहुंच चुके हैं। 

इधर स्थिति कमजोर होते देख कब्जाधारियों ने महिलाओं और बच्चों को आगे कर दिया। सभी लाठी-डंडे लेकर जवाहर बाग के गेट और आसपास तैनात थे। प्रशासन ने इनसे निपटने के लिए पहले ही महिला कंपनी भी बुला ली थी। इधर कब्जाधारी पुलिस को उकसाते रहे लेकिन कार्रवाई का आदेश न मिलने के चलते करीब 1000 जवानों ने कोई एक्शन नहीं लिया। इस दौरानकब्जाधारी बार बार पुलिस और प्रशासनिक से उनकी देश में रहने की नागरिकता संबंधी पूछते रहे। अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। शाम छह बजे तक दोनों ओर से जबरदस्त तनातनी बनी रही। एहतियातन देर रात तक पुलिसकर्मी पोजीशन लिए हुए थे।

डीआईजी ने की बैठक 
जवाहर बाग प्रकरण में कब्जाधारियों और पुलिस के बीच तनातनी की सूचना पर दोपहर करीब ढाई बजे डीआईजी अजय मोहन शर्मा मथुरा पहुंच गए थे। डीआईजी ने प्रभारी डीएम सीडीओ मनीष वर्मा और एसएसपी डा. राकेश सिंह संग बैठक की और जवाहर बाग खाली कराने के लिए चर्चा होती रही। इसके बाद डीआईजी जवाहर बाग पहुंचे बिना लौट गए। 

बॉडी प्रोटेक्टर के वजन और गर्मी से अकुलाए जवान
जवाहर बाग में ड्यूटी के दौरान अचानक बढ़े तनाव में तपती दोपहरी में एक इंच मोटे बॉडी प्रोटेक्टर को पहनने से उमस और गर्मी से जवान अकुलाने लगे थे। कार्रवाई को आगे न बढ़ते देख कुछ जवानों ने आक्रोश भी व्यक्त किया। 
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