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Mathura News: कान्हा की नगरी में कहीं डॉक्टर तो कहीं सखी बने हनुमान

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वृंदावन। कान्हा की लीला देखने के लिए वृंदावन वास के लिए देवता भी आतुर रहे हैं। अब यहां उसकी निशानियां शेष हैं। यहां हनुमान जी कहीं डॉक्टर के रूप में लोगों की मदद कर रहे हैं तो कहीं लहंगा चोली पहनकर सखी रूप में दर्शन दे रहे हैं। बालाजी मंदिर में तो अपने पांच भाइयों के साथ विराजमान हैं। यहां उनकी जन्मकुंडली के दर्शन होते हैं। उनके अवतार के रूप में नींव करोरी महाराज का मंदिर भी है।
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अट्ल्ला चुंगी स्थित वृंदावन बालाजी देवस्थान पर हनुमानजी अपने पांच भाईयों मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान, घृतिमान के साथ विराजमान हैं। आध्यात्म गुरु अनुराग कृष्ण पाठक को इस मंदिर के निर्माण का स्वप्न आया था। इसके बाद हनुमान जयंती 16 अप्रैल 2022 को मंदिर का निर्माण किया गया। वह बताते हैं कि विश्व का यह पहला मंदिर है जहां हनुमानजी की कुंडली के दर्शन होते हैं। साथ ही यहां सिंदूरी सालासर बालाजी विराजित हैं। यहां नींव करोरी महाराज का भी एक कक्ष है, जहां उनकी वस्तुएं आज भी संरक्षित हैं।
परिक्रमा मार्ग पर मिथिलाकुंज आश्रम में हनुमान चारुशिला सखी रूप में दर्शन देते हैं। यहां हनुमान जी लहंगा-चोली पहनकर भक्तों को दर्शन देने के साथ श्री सीताराम युगल सरकार की सेवा में लीन हैं। इस दिव्य विग्रह के एक हाथ में पूजन की थाली और दूसरे में चंवर है, जो निकुंज सेवा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। मंदिर के महंत महामंडलेश्वर किशोरी शरण महाराज के अनुसार हनुमानजी के इस स्वरूप की प्राण-प्रतिष्ठा जगतगुरु निंबार्काचार्य राधेश्याम शरण देवाचार्य महाराज द्वारा की गई थी।
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सखी स्वरूप का उल्लेख श्रीहनुमत संहिता, अगस्त संहिता और लोमश रामायण जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि वे यूथेश्वरी श्रीचंद्रकला सखी के सान्निध्य में मुख्य सखी के रूप में युगल जोड़ी की नित्य सेवा करते हैं। वहीं यहां ददरौआ हनुमान जी का मंदिर भी है। यहां हनुमान जी डॉक्टर रुप में अपने भक्तों को दर्शन देकर उनके कष्ट मिटा रहे हैं। यहां सुबह से बीमार लोग खुद को ठीक करने के लिए प्रार्थना करते नजर आते हैं।
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