मथुरा। करीब एक सप्ताह से तटीय इलाकों के वाशिंदों के लिए दहशत का सबब बने कालिंदी के जलस्तर में रविवार को मामूली गिरावट आई। लेकिन इससे लोगों ने बड़ी राहत महसूस की।
पहाड़ों के साथ हरियाणा एवं दिल्ली में हो रही लगातार वर्षा से ताजेवाला एवं ओखला डैम उफन रहे थे। एक सप्ताह से चली आ रही इस स्थिति के कारण यमुना भी उफान पर थी। इससे तटीय इलाकों में बसी कालोनियों के साथ अपस्ट्रीम के गांवों में हालात बिगड़ते जा रहे थे। लेकिन रविवार को ताजेवाला एवं ओखला डैम से उत्सर्जन कम होने के कारण यमुना की उफनती लहरें कुछ थमीं नजर आईं।
रविवार को ताजेवाला डैम से उत्सर्जन 28,356 क्यूसेक रह गया तो ओखला से मात्र 39 हजार क्यूसेक पानी उत्सर्जित हुआ। इसके चलते यमुना के वाटर लेबल में 26 सेमी की गिरावट आई। हालांकि अब भी प्रयाग घाट पर यमुना खतरे के निशान से 20 सेमी ऊपर यानि 165.40 मीटर पर बह रही है। लेकिन शेरगढ़ के गांव बहेटा, बाबूगढ़, छिनपारई, वृंदावन के केशी घाट तथा मथुरा की गणेशधाम समेत अन्य कालोनियों की ओर बढ़ रहा पानी कम हो गया। सिंचाई विभाग के एक्सईएन एसके सिंघल ने बताया कि यमुना का वाटर लेबल कम हुआ है। यदि पीछे से ज्यादा पानी नहीं छोड़ा गया तो वाटर लेबल और कम हो जाएगा।