वृंदावन। ग्रीष्म ऋतु में ठाकुर जी को ठंडक पहुंचाने के लिए भक्त सेवा भाव से जुटे हैं। वे ठाकुर जी के लिए फूल बंगला सजाने और मंदिरों में सायंकाल समाज गायन के मध्य ठाकुरजी के समक्ष फव्वारे चलाए जाने की परंपरा का निर्वहन ग्रीष्म ऋतु के आगमन से प्रारंभ कर देते हैं। प्राचीन मंदिरों के अतिरिक्त घरों में की जाने वाली भाव सेवा के अंतर्गत भी श्रद्धालु अपने आराध्य को शीतलता प्रदान करने के भाव से फव्वारों के मध्य विराजमान करते हैं।
गर्मी में ठाकुर को जी शीतलता देने के लिए भक्त उन्हें पुष्पों और निकुंजों से भी हरितिमा प्रदान करते हैं। राधारमण मंदिर के सेवायत आलोक गोस्वामी ने बताया कि इन दिनों ठाकुरजी को प्रतिदिन लगने वाले भोग में भी विविधता का सम्मिश्रण हो जाता है। ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने वाले ठंडाई, शिकंजी, अमरस, खरबूजा, तरबूजा, ककड़ी, फालसेब, दूध, रबड़ी, खीरसा आदि से बने शीतल और स्वादिष्ट खाद्य तथा पेय पदार्थ निवेदित किए जाते हैं। ठाकुरजी की सेवा का यह क्रम लगभग ग्रीष्म ऋतु में लगभग चार महीनों में श्रावण मास तक चलता है।
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ऋतुनूकूल पोशाकें भी बाजार में
वृंदावन (ब्यूरो)। ठाकुरजी के लिए गर्मियों में विशेष डिजाइनरपरिधान भी बाजार में आ गए हैं। विभिन्न हल्के और शीतल रंगों से निर्मित पोशाकें बाजार में उपलब्ध हैं।
एयरकंडीशनर का भी प्रयोग
बदलते जमाने में ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के तरीकों में भी बदलाव आया है। विभिन्न मंदिरों में ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए एयरकंडीशनर का प्रयोग किया जा रहा है। पानी की किल्लत और आधुनिकता के चलते भक्त ठाकुर जी को इस नए तरीके से भी शीतलता प्रदान कर रहे हैं।