आर्थिक तंगी से परेशान एक पिता ने जैसे-तैसे बेटी की शादी तय की, शादी वाले दिन उन्होंने यथाशक्ति बारात की आवभगत की। इस दौरान वह बिरादरी के कुछ लोगों को दावत नहीं दिए।
इससे नाराज बिरादरी वालों ने मामला पंचायत के सामने रखा। फिर पंचायत ने भी अपना तुगलकी फरमान सुना दिया। फैसला उस परिवार के सामाजिक बहिष्कार का। मामला मुरादाबाद जिले के पीलकपुर गुमानी गांव का है।
पीड़ित परिवार ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई है और चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो वह परिवार के साथ आत्महत्या कर लेगा।
घर में घुसकर हमला
गांव के जय सिंह के हवाले से पुलिस ने बताया कि उसने अपनी बेटी की शादी 15 अप्रैल को हिंदू रीति रिवाज से शिव मंदिर में की थी। मगर आर्थिक तंगी के चलते गांव के लोगों को दावत नहीं दे सका।
जिसकी वजह से ही गांव के कुछ लोगों ने बिरादरी के लोगों को भड़काना शुरू कर दिया। जय सिंह ने आरोप लगाया कि इसी को मुद्दा बनाकर 30 अप्रैल की रात करीब 11 बजे कुछ लोगों ने घर में घुसकर हमला किया।
इसके बाद 16 मई को उन लोगों ने पंचायत कर जय सिंह के परिवार के सामाजिक बहिष्कार का फैसला सुनाया।
बेटी को बेचने का आरोप
बकौल जय सिंह, 'बिरादरी के लोग उस पर बेटी को बेचने का आरोप लगा रहे हैं और उसे बिरादरी को सौंपने का दबाव बना रहे हैं। ऐसा नहीं करने पर वे उसे और उसकी पुत्री को जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं। साथ ही 15 दिन के अंदर गांव छोड़ने और पुलिस में शिकायत करने पर जान से हाथ धोने की धमकी दे रहे हैं।'
कोतवाली प्रभारी एनपीएस राघव ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, गांव के प्रधान राजवीर सिंह यादव ने इसे एक जाति का मामला बताते हुए कुछ भी कर पाने में असमर्थता जताई है।