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UP News: जर्रे-जर्रे में छिपी विरासत, कण-कण है इतिहास का गवाह; इस जिले के अनगिनत स्थलों को संरक्षण की आवश्यकता

Sat, 06 Jul 2024 12:31 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी

सार

मैनपुरी जिले के जर्रे-जर्रे में विरासत छिपी है। कण-कण इतिहास का गवाह है। इस जिले के अनगिनत स्थलों को संरक्षण की आवश्यकता है। 
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कुरावली में खेत के समतलीकरण में मिले अस्त्र।, औंछा स्थित अजोम कुंड से मिली मूर्ति। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में कुरावली के गांव गणेशपुर में दो साल पहले मिले तांबे हथियारों पर मिले चिह्नों ने एएसआई को चौंका दिया है। चार हजार साल के करीब पुराने इन हथियारों पर मिले चिह्न अपने आप में अनौखे हैं। लेकिन मैनपुरी के लिए ये कोई नही बात नहीं है। मयन ऋषि की तपोभूमि मैनपुरी अपने जर्रे-जर्रे में विरासत को समेटे है। इसका कण-कण गौरवशाली इतिहास का गवाह है। मैनपुरी में अनगिनत ऐसे स्थल हैं जहां मूर्तियां, पत्थर और ताम्रनिधियां मिलती रही हैं। लेकिन उस क्षेत्र के संरक्षण का काम आज तक नहीं हो सका।

च्यवन ऋषि आश्रम, औंछा

मैनपुरी में औंछा से पुरातन काल की मूर्तियां मिलने की शुरुआत हुई थी। ऋषि च्यवन के आश्रम में बने कुंड की खोदाई के दौरान हर बार कोई न कोई मूर्तियां मिलीं। एएसआई को सूचित भी किया गया, लेकिन इसके बाद इन पर ध्यान नहीं दिया गया। बीते वर्ष भी यहां अजोम कुंड की खोदाई में दो मूर्तियां मिली थीं। इन्हें थाने में रखवा दिया गया था। एक टीम भी थाने आकर जानकारी जुटाने के बाद वापस लौट गई थी। अब मूर्तियों की किस्मत में थाने का ही साथ लिखा है।

टीला करीमगंज

मैनपुरी से कुरावली फोरलेन पर स्थित गांव करीमगंज में भी समय-समय पर जमीन से निकले पत्थर इतिहास की गवाही देते रहे हैं। गांव में स्थित एक टीले के किनारे दो साल पहले खेलने वाले बच्चों को कुछ रंग-बिरंगे पत्थर मिले थे। इसके बाद एक मूर्ति भी मिली। ये सिलसिला कई दिनों तक जारी रहा। लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। बाद में खलनऊ से एएसआई की एक टीम ने आकर जानकारी जुटाई। गांव के लोगों ने कुछ पत्थर उन्हें उपलब्ध भी कराए थे, लेकिन कुछ नहीं हो सका। गांव के लोगों के अनुसार टीले के नीचे एक प्राचीन किला है, अगर खुदाई हो तो यहां भी नया इतिहास सामने आ सकता है।

गणेशपुर

कुरावली के गांव गणेशपुर में 11 जून 2022 को खेत की जुताई के दौरान ताम्रनिधियां और भट्ठी मिली थी। सूचना पर एएसआई आगरा की टीम इन्हें ले गई थीं। लेकिन आसपास के स्थलों पर कोई भी सर्वे नहीं किया गया। अगर यहां काम होता तो यहां और भी इतिहास के पन्ने खुल सकते थे। प्रशासन भी एएसआई को सूचना देने के बाद शांत बैठ गया। अब ये ताम्रनिधियां 4 हजार साल पुरानी होने की बात सामने आने के बाद भी कोई हलचल नजर नहीं आ रही है।

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मैनपुरी के पौराणिक और ऐतिहासिक स्थलों को सहेजने का काम पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा किया जा रहा है। कुरावली क्षेत्र के गांव गणेशपुर में जहां से ताम्रनिधियां मिली हैं वहां टीम को भेजा जाएगा। टीम के सर्वे के अनुसार ही आगे का निर्णय किया जाएगा। -जयवीर सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री

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