मैनपुरी। गली और मोहल्लों में लगे हैंडपंपों में धड़ल्ले से लगाई जा रही सबमर्सिबल पंपों के चलते पानी संकट गहराने लगा है। बिना अनुमति के लग रही सबमर्सिबल पंपों से जमीन का जल स्तर इतना ज्यादा नीचे पहुंच गया है। कि 40 से 50 फीट गहरे हैंडपंपों की जलधारा सूखने लगी है। यदि इस ओर जल्द ही पालिका प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न हुई तो हैंडपंपों पर निर्भर शहर की आधी से ज्यादा आबादी पानी की एक-एक बूंद को तरस जाएगी।
गर्मी आते ही पालिका क्षेत्र में पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। वोल्टेज सही न मिलने से नलकूप टंकियों को नहीं भर पा रहे हैं। वहीं नगर क्षेत्र में कई लोगों ने सार्वजनिक हैंडपंपों सबमर्सिबल डाल रखे हैं। इसके चलते नगरवासियों को पानी की किल्लत हो रही है। बरनाहल ब्लाक पहले ही डार्क एरिया घोषित हो चुका है। अन्य क्षेत्रों में भी जल स्तर की गिरावट भविष्य में बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकती है। बरनाहल और करहल क्षेत्र में जल स्तर पांच मीटर नीचे चले जाने से नलकूप तो दूर हैंडपंप लगवाना भी मुश्किल हो चला है। ब्लाक सुल्तानगंज क्षेत्र की स्थिति भी कुछ यही है। क्षेत्र के ग्राम सिमरई, दलीपपुर जसवंतपुर, जिरोली, सुन्नामई, जरामई, नगला कवीश्वर, गौशलपुर जैसे दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां मई-जून के महीने में पेयजल का संकट गहरा जाता है। हैंडपंप तो पानी देते हैं, लेकिन घरेलू हैंडपंप या तो पानी देना बंद कर देते हैं, या पानी के साथ कीचड़, बालू देते हैं।
सबमर्सिबल पंप डालने वाले लोगों को चिह्नित कर नोटिस भेजे गए हैं। इसमें सभी को तीन दिन के अंदर हैंडपंपों से सबमर्सिबल पंप हटाने के निर्देश दिए हैं। शीघ्र ही पालिका कर्मियों द्वारा अभियान चलाया जाएगा। यदि अभियान में ऐसे केस मिले तो उक्त लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने लोगों से कहा कि जल संयोजनों में टोंटी लगा लें जिससे पानी की बर्बादी न हो। घरों के अंदर किए हैंडपंपों को बाहर निकाला जाए।
रामपाल यादव, ईओ, नगरपालिका