दल की प्रतिमा में पुष्प अर्पित कर नमन करते बुंदेली समाज के लोग
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महोबा। बुंदेलों ने आल्हा खंड की 52 लड़ाइयों के महानायक ऊदल को आज नमन किया। आल्हा के छोटे भाई ऊदल ने 52 में से 23 लड़ाइयां अकेले अपने नेतृत्व में जीतीं। उनकी जयंती पर बुंदेलों ने दोपहर को उनके स्मारक को सजाया।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि वीर आल्हा को युधिष्ठिर और ऊदल को भीम का अवतार माना है। आल्हा और ऊदल दोनों का लालन-पालन चंदेल नरेश परमाल ने महोबा में किया। उनकी वीरता से चंदेल राज्य का चारों दिशाओं में विस्तार हुआ। बताया कि ऊदल की मृत्यु हो जाने के बावजूद गुरू गोरखनाथ के कहने पर आल्हा ने पृथ्वीराज चौहान को प्राणदान दे दिया था। महामंत्री डा. अजय बरसैया ने बताया कि ऊदल चौक का निर्माण 1974 में तत्कालीन नगरपालिका चेयरमैन बाबू लाल तिवारी ने करवाया जबकि आल्हा चौक 1984 में तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट संजीव अहलूवालिया ने बनवाया था। इन महावीरों के स्मारक हर वर्ष कजली महोत्सव के वक्त सजाए जाते हैं लेकिन इस वर्ष कोरोना के चलते कजली महोत्सव रद्द हो जाने के कारण इन स्मारकों की रंगाई पुताई नहीं हुई है।
इस मौके पर ग्यासी लाल कोस्टा, बृजेश वर्मा व शिवम समेत तमाम लोग मौजूद रहे।