खन्ना (महोबा)। ग्राम पंचायत खन्ना के मोहल्ला नगरी की एक हजार की आबादी की प्यास दो टैंकर नहीं बुझा पा रहे हैं। जिसके दरवाजे टैंकर खड़ा हो जाता है, उसे तो भरपूर पानी मिल रहा है लेकिन कुछ ग्रामीण खाली डिब्बे लेकर लौटने को मजबूर दिखे। पानी न मिलने पर ग्रामीण व कुछ महिलाएं चंद्रावल नदी और अन्य जलस्रोतों से साइकिल तथा सिर पर बर्तन रखकर पानी लाते नजर आईं।
दस हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत खन्ना की अनुसूचित जाति की बस्ती भीषण पेयजल संकट से जूझ रही है। 14 जून को अमर उजाला में खबर छपने के बाद ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने नगरी मोहल्ले में दो टैंकरों से आपूर्ति शुरू कराई। बुधवार की दोपहर टैंकर गांव पहुंचा। 10 से अधिक लोग डिब्बे व बर्तन लेकर पहले से पानी भरने के लिए खड़े नजर आए। टैंकर आते ही टोंटी से व छोटे पाइप लगाकर पानी भरना शुरू कर दिया। इस दौरान मोहल्ले की अन्य महिलाएं भी बर्तन लेकर पहुंच गईं। आधा घंटे के अंदर ही टैंकर खाली हो गया। कुछ लोगों को तो भरपूर पानी मिला लेकिन बाद में पहुंचने वाली एक दर्जन से अधिक महिलाओं को एक-एक डिब्बा पानी ही नसीब हो सका।
शाम को भी कुछ ऐसा ही नजारा रहा। खाली बर्तन लेकर लौट रही प्रियंका व मंजू ने बताया कि उन्हें भरपूर पानी नहीं मिला। अब वह चंद्रावल नदी व अन्य जलस्रोतों से पानी लाने को मजबूर होंगे। शाम के समय युवतियां व ग्रामीण दो किमी दूर चंद्रावल नदी से पानी लाते नजर आईं।
ग्राम प्रधान रतन प्रजापति का कहना है कि नगरी मोहल्ले के लिए पानी के दो टैंकर भेजे जा रहे हैं। यदि मोहल्लेवासी और मांग करते हैं तो टैंकरों के चक्कर बढ़ाए जाएंगे।
बोले मोहल्ले वासी
शिवदेवी ने बताया कि मोहल्ले में पानी के टैंकर तो आ रहे हैं लेकिन जिसके दरवाजे टैंकर खड़ा हो जाता है। वह भरपूर पानी भर लेता है। इसके बाद भीड़ अधिक हो जाने से पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। जिससे वह नदी से पानी लाकर काम चला रही हैं।
माया का कहना है कि मोहल्ले में आज दो बार टैंकर आया लेकिन भीड़ अधिक होने से एक डिब्बा पानी ही मिल सका। गर्मी के मौसम में पानी ज्यादा लगता है, इसलिए उन्हें नदी से पानी लाना पड़ रहा है। मोहल्ले में कुछ और टैंकर बढ़ाने की जरूरत है।