पनवाड़ी (महोबा)। विलेज ऑफ गुड गवर्नेंस थीम पर ग्राम पंचायत पनवाड़ी को भले ही चयनित किया गया है, लेकिन अन्य ग्राम पंचायतों का हाल बेहाल है। ब्लॉक की 11 ग्राम पंचायतों में सचिवालय ही नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीणों को ऑनलाइन सेवाओं के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कुछ ग्राम पंचायतों में सचिवालय भवन वर्षों से अधूरे पड़े हैं।
ग्राम पंचायतों का गठन हुए एक वर्ष से अधिक हो गया लेकिन ग्राम सचिवालयों की स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए पंचायत सचिवालय का निर्माण कराया जाना था ताकि गांव के लोगों को ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिले सके। ग्राम पंचायत रिछा, तेइया, सलालपुरा, बुढ़ेरा, रिवई, लोहरगांव, नगाराघाट, बिजरारी, अलीपुरा, जखा व काशीपुरा में आज तक सचिवालयों का संचालन शुरू नहीं हो सका। कुछ ग्राम पंचायतों में अधूरे भवन पड़े है।
सचिवालय न होने से ग्रामीणों को आय, जाति, निवास, जन्म-मृत्यु प्रमाण व अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लेखपाल, सचिव, पंचायत सहायक, डाटा इंट्री ऑपरेटर कर्मचारियों के सचिवालय में बैठने के निर्देश हैं लेकिन सचिवालय न होने से ग्रामीणों को ब्लॉक व तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। खंड विकास अधिकारी राहुल पांडेय का कहना है कि ग्राम पंचायतों में सचिवालयों का निर्माण कराया जा रहा है। जल्द ही ग्रामीणों को ऑनलाइन सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
ग्राम पंचायत अलीपुरा के मजरा सारगपुरा निवासी देवेंद्र अहिरवार ने कहा कि गांव में सचिवालय नहीं है। कोई भी कर्मचारी महीनों गांव नहीं आता और न ही बैठक की जाती हैं। उन्हें ऑनलाइन कार्यों के लिए पनवाड़ी जाना पड़ता है।
ग्राम पंचायत काशीपुरा के जितेंद्र सिंह का कहना है कि सचिवालय न होने से कर्मचारी गांव नहीं आते। लेखपाल से काम था लेकिन वह गांव ही नहीं आए। इससे वह ब्लॉक व तहसील के चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं।