कुलपहाड़ (महोबा)। चकबंदी की समस्या का जल्द निस्तारण की मांग किसान कर रहे हैं।
कुलपहाड़ मौजे में चकबंदी की प्रक्रिया 1969 में प्रारंभ हुई थी कई बार यह प्रक्रिया बाधित हुई। पांच बार रिमाइंड हुई इस बीच जो पुराने दस्तावेज थे वह जीर्ण शीर्ण हो चुके हैं और लोगों को कहना है कि यदि चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई आगे दस्तावेजों का मिलना बेहद मुश्किल होगा। श्रीप्रकाश अरजरिया, बाबूलाल अहिरवार, राजेश, डॉ. किशोरी लाल स्वर्णकार विष्णु दयाल, हरसहाय अहिरवार और कमलेश यादव आदि का कहना है कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान कुछ खामियां निश्चित रूप से रह गई हैं। ऐसे बहुत से भूमिहीन लोग हैं जिन्हें पिछले 50 वर्षों से अपनी ही भूमि पर कब्जा नहीं मिला था उन्हें चकबंदी प्रक्रिया से कब्जा मिल गया। मलखान, छिदियां, अर्जुन, रामप्यारी, दिनेश कुमार सहित दर्जनों ऐसे लोग हैं जिन की भूमि पर दबंग कब्जा किए हुए थे और चकबंदी के बाद उन्हें अपनी जमीन पर कब्जा मिल गया।
पूर्व ब्लाक प्रमुख राजेश चौबे का कहना है कि चकबंदी प्रक्रिया पूरी होती है और धारा 52 का प्रकाशन होता है, तो मात्र 15 रुपये में किसानों को तुरंत खसरा खतौनी मिल सकेगी। जिन किसानों के साथ नाइंसाफी हुई है उन्हें अपील करने का अधिकार है।