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जिन्दगी का साथ निभाता चला गया, हर रफ़क्र को धुएं में उड़ाता चला गया

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महोबा। दोस्तों के साथ 14 साल की उम्र में सिगरेट पीने की लत लग गई। शुरुआत में एक-दो सिगरेट पीता था। बाद में स्थिति यह हो गई कि सिगरेट न मिलने पर परेशानी होने लगती थी। शौक में शुरू हुई यह लत इस कदर बढ़ गई कि स्वास्थ्य की फिक्र धुएं में उड़ाता चला गया।
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चौसियापुरा के रहने वाले 36 वर्षीय राजेंद्र (परिवर्तित नाम) बताते हैं कि वह प्राइवेट वाहन चलाते हैं। एक बार सीने में तेज दर्द होने लगा। वह सिगरेट पीने के लिए बाहर जाने लगा। जैसे-जैसे सीढ़ियां उतर रहा था वैसे-वैसे दर्द बढ़ रहा था और पसीना आने लगा। सांस लेने तक में दिक्कत होने लगी और लड़खड़ाकर गिर गया। जिला अस्पताल लेकर लोग पहुंचे। यहां डाक्टरों ने बताया कि धूम्रपान की वजह से उसके फेफड़े खराब हो रहे हैं। सिगरेट पीना न बंद किया तो स्थिति गंभीर हो सकती है। दो साल से लगातर जिला अस्पताल में बने मन कक्ष में काउंसिलिंग करा रहे हैं । उसने सिगरेट छोड़ दी और अब अपने परिवार व पड़ोसियों को इससे दूर रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं ।
एनडीसी के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ. वीके चौहान का कहना है कि हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को नो स्मोकिंग डे मनाया जाता है। इस साल यह 9 मार्च को मनाया जा रहा है। इस दिन लोगों को धूम्रपान से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरूक किया जाता है। युवाओं में यह शौक लत बन रहा है। युवा तनाव को कम करने के लिए स्मोकिंग के लती बन रहे हैं। जिला अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य विभाग में तैनात मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्यकर्ता (पीएसडब्ल्यू) प्रेमदास ने बताया कि सिगरेट की लत से छुटकारा पाने के लिए मन कक्ष में रोजाना 8-10 लोग आते हैं। इसमें सबसे ज्यादा 18 से 40 वर्ष के युवा हैं।
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रखें अपनी सेहत का ध्यान
हमीरपुर। रमेड़ी निवासी दिनेश (40) ने बताया कि स्कूल के समय से वह दोस्तों के साथ हंसी मजाक में धूम्रपान करने लगे थे। कुछ साल पहले उन्हें समझ आया कि धूम्रपान न सिर्फ उनकी बल्कि और के लिए भी नुकसानदेह है। डॉक्टर से मिलकर सलाह ली। इसके बाद से धूम्रपान छोड़कर सामान्य जीवन जी रहे हैं।
तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. महेशचंद्रा का कहना है कि तंबाकू जागरूकता को लेकर कार्यक्रम कराए जा रहे हैं। यह मनुष्य के शरीर में हजारों रसायनों को छोड़ता है। इसका असर फेफेड़ों के साथ दिल व शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है। अगर हफ्ते भर ध्रूमपान नहीं किया तो आप पूरी तरह से ध्रूमपान छोड़ सकते हैं। ज्यादातर मुंह का कैंसर ऐसे लोगों को हो रहा है, जो नशे के आदी हैं। (संवाद)
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