कबरई (महोबा)। अब हमहूं अपने सांसद से जी से गुहार लगाइहैं कि सुनील को भी छुड़वा दें। जिससे वह भी जल्द घर लौट आवै। यह कहना है कि पाकिस्तान में जेल में बंद सुनील की सास फूलारानी का। बांदा जिले के रामबहादुर को पाकिस्तान की जेल से छूटने से जनपद निवासी सुनील के परिवार की उम्मीद बढ़ गई है कि वह जल्द रिहा हो जाएगा। सुनील चार साल से पाकिस्तान की जेल में बंद है। सुनील की दो बेटियां और पत्नी और सास उसके लौटने की राह देख रहीं हैं।
थाना कबरई के लिलवाही गांव निवासी फूलारानी ने बताया कि 1996 में उसने अपनी दो बेटियों रेखा व मीरा की शादी बांदा जिले के महेंदू गांव निवासी प्यारेलाल कुशवाहा के पुत्र सुनील के साथ रेखा की व विनोद के साथ मीरा की शादी की थी। उस समय भी ससुराल वाले गुजरात में मछुआरे का काम करते थे। शादी के कुछ दिन बाद ही बेटी रेखा अपने पति सुनील व दोनों बेटियों के साथ लिलवाही में ही रहने लगी थी। सुनील अपने महेंदू निवासी भाई विनोद, बाबू व भतीजे राजू के साथ आठ अक्तूबर 2017 को गुजरात के ओखा (पोरबंदर) मछली पकड़ने के काम के लिए गए थे। कुछ दिन बाद भाई विनोद वापस घर लौट आया तथा सुनील, बाबू व राजू अपने काम पर लगे रहे। 9 नवंबर 2017 को ये तीनों बिलगांव बांदा निवासी रज्जू, बच्ची एवं जसईपुर तिंदवारी निवासी विवेक, रफीक व रोहित के साथ ओखा बंदरगाह स्टीमर के द्वारा मछली पकड़ने गए थे तभी पाकिस्तान के समुद्री सीमा में पहुंचते ही पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा इनके स्टीमर को घेरकर पकड़ लिया गया। इसके बाद पाकिस्तान के कराची के लांडी जेल में निरुद्ध कर दिया गया। सुनील का महेंदू निवासी छोटा भाई बाबू स्टीमर चालक था। पकड़े गए मछुआरों के साथियों द्वारा फोन के माध्यम से उनके घर वालों को सूचना दी गई थी। बिलगांव बांदा निवासी रज्जू पुत्र चुनूबाद दो वर्ष पूर्व पाकिस्तान जेल से रिहा होकर अपने घर आ गया था।
चिट्ठी न कोई संदेश
सुनील की पत्नी रेखा ने बताया कि अक्तूबर 2007 में भी सुनील को मछली पकड़ते समय पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा पकड़कर कराची जेल में बंद कर दिया गया था, किंतु तब चिट्ठी आती रहतीं थीं तथा तीन साल बाद 13 अगस्त 2010 को रिहा कर दिया गया था। दोबारा 2017 में सुनील फिर से पाकिस्तान की सीमा में पहुंच गया। जिसके बाद वह बंद हैं। इस बार आखिरी चिट्ठी 20 मार्च 2020 को आई थी। कोरोना शुरू होने के बाद डेढ़ साल से कोई चिट्ठी भी नहीं आई है और न ही कोई संदेश मिल रहा है।
पैसा कमाकर व्यापार करने की बात कहकर निकला था सुनील
सुनील की पत्नी रेखा ने बताया कि गांव के ही जूनियर हाई स्कूल में रसोइया का काम करती हैं। जिसमें 1500 रुपये प्रति माह वेतन मिलता है। जिससे दोनों बेटियों की पढ़ाई का ही खर्च पूरा नहीं हो पाता है। 18 वर्षीय बड़ी बेटी खुशबू बीए प्रथम वर्ष तथा चौदह वर्षीय छोटी बेटी रोशनी कक्षा नौ में पढ़ रही है। रेखा ने बताया कि कुछ ही दिनों में बड़ी बेटी खुशबू की शादी करना है जिसकी चिंता सताती रहती है। उन्होंने बताया कि पति सुनील कह कर गए थे कि अब आखिरी बार जा रहे हैं कुछ पैसा कमा लाएं फिर यहीं कोई व्यापार करेंगे।
तीन साल पहले पत्नी ने डीएम से लगाई थी गुहार
सुनील की पत्नी रेखा ने 19 सितंबर 2018 को पति की रिहाई के लिए जिलाधिकारी से गुहार लगाई थी जिसमें प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री सहित उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री को भी प्रतिलिपि भेजी गई थी। जिससे उसके पति के वापसी का रास्ता निकल सके।
पूरी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है: राम अवतार
सुनील के साले राम अवतार कुशवाहा का कहना है कि हमारे चार बहिनें हैं। सबसे बड़ी बहिन रेखा हमारे गांव में ही रहती है। उसके पति के पाकिस्तान जेल में होने के कारण बहिन व भांजियों की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। मेरे एक बेटा व दो बेटियां हैं तथा केवल पांच बीघे जमीन है, जिससे ज्यादा मदद नहीं हो पाती है।
बोले अधिकारी
सुनील के परिजन कार्यालय में आकर एक प्रार्थना पत्र दे दें। जिससेे उनकी बात शासन तक पहुंचाई जाएगी। उनकी वापसी के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
-सत्येन्द्र कुमार, जिलाधिकारी