महोबा। विधानसभा चुनाव के मतदान में मतदाताओं ने नोटा का बटन भी खूब दबाया। परिणामस्वरूप में कई नेता नोटा में पड़े वोट से पीछे छूट गए। चरखारी विधानसभा सीट पर 2256 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया है।
इस सीट पर नौ उम्मीदवारों में से निर्दलीय अनिल कुमार को 1977, भुवनेंद्र नरायण सिंह को 973, आप प्रत्याशी प्रेमनरायण राजपूत को 1245 और राइट टू रिकाल पार्टी प्रत्याशी कुंवर लाल को 1058 मत मिले, जो नोटा से भी कम हैं।
महोबा विधानसभा सीट पर 1514 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया है। बहुजन मुक्ति के एहसान सौदागर को 961, भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कमलेश कुमार को 1102, आजाद समाज पार्टी के देवप्रताप सिंह को 694, निर्दलीय अनिल कुमार को 841, अनिल सिंह को 432, अर्जुन को 555, देवराज को 843, देवेंद्र कुमार नगायच को 635, महेश को 1145 मत मिले, जो नोटा से भी कम हैं।
नोटा का सबसे पहले अमेरिका में हुआ था प्रयोग
सबसे पहले 1976 में अमेरिका के कैलीफोर्निया में इस्ला विस्टा म्युनिसिपल एडवाइजरी काउंसिल के चुनाव में नोटा का इस्तेमाल हुआ। अमेरिका में इसके लिए ‘नन ऑफ दीज कैंडिडेट’ शब्द का इस्तेमाल होता है, जबकि यूक्रेन में इसे ‘अगेंस्ट ऑल’ और स्पेन में ‘ब्लैक बैलट’ कहा जाता है। भारत में इसका मतलब है- नन ऑफ द अबव है।