महोबा। कोरोना के चलते शादीघरों में ताले लटक जाने से दो हजार लोगों के सामने रोजी-रोटी के लाले पड़ गए। श्रमिकों के बेरोजगार हो जाने से उनका परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। शादीघरों से जुड़े डीजे, बैंड-बाजे, आर्केस्ट्रा, बिजली सजावट और दोना-पत्तल उठाने वाले भी दो जून की रोटी की जुगाड़ में भटक रहे हैं। तीन माह से काम न मिलने से तमाम लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
मार्च माह में कोरोना वायरस की सुगबुगाहट होते ही लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। लॉकडाउन घोषित होने के बाद जिले में शादी-विवाह घरों, कॉलेज, स्कूलों, बाजार और धार्मिक स्थलों को बंद करा दिया गया। कहीं पर भी भीड़ एकत्र न होने के लिए पुलिस बल तैनात कर दी गई। शादी-विवाह घरों में भी दस लोगों को ही शामिल होने की इजाजत दी गई थी। होटलों और शादीघरों में भी शादी के अलावा हर तरह से आयोजनों पर रोक लगा दी गई। जिससे जिले में सबकुछ ठप हो गया था। लोग घरों में कैद हो गए थे।
अब जिला अनलॉक तो घोषित हो गया है, लेकिन भीड़ से बचने के लिए शादी घरों को खोलने के कोई आदेश जारी नहीं किए। जिले में करीब एक सैकड़ा विवाहघर हैं। शादी समारोह से जुड़े पांच हजार लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट है। शादी में गीत संगीत का कार्यक्रम देने वाले कलाकार, टेंट और बर्तन देने वाले टेंट संचालक, सजावट करने वाले, फूल मालाएं बनाने वाले, दोना पत्तल फेंकने और बर्तन धोने वाले, कारों की सजावट करने वाले तमाम लोग बेकार हो गए।