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परिवार निजोयन: महिला नसबंदी में दिदवारा गांव बना मिसाल

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महोबा। परिवार नियोजन में पनवाड़ी ब्लाक का दिदवारा गांव मिसाल कायम कर रहा है। यहां 52 फीसदी दंपतियों ने नसबंदी कराकर स्थायी साधन अपना लिया है। गांव में 827 दंपतियों में से 430 महिलाओं ने पहले, दूसरे व दो से अधिक बच्चों पर नसबंदी करा ली है। किसी ने परिवार वालों से तो किसी ने आंगनबाड़ी दीदी की प्रेरणा से यह साधन अपनाया है।
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गांव की 24 वर्षीया ऊषा ने बताया कि उसके दो बच्चे हैं। पति मजदूरी करता है। उसने दो बच्चों पर परिवार नियोजन अपनाने की इच्छा जताई। इस पर उसके पति ने भी अपनी सहमति दे दी। लेकिन ससुराल वालों से इसकी इजाजत लेने की हिम्मत नहीं हो पा रही थी। एक दिन उसके पति ने अपने पिता रामपाल से बात की। उन्होंने भी इस पर अपनी रजामंदी दे दी। उसने गांव की आशा कार्यकर्ता के साथ स्वास्थ्य केंद्र जाकर नसबंदी करवा ली।
इसी गांव की 26 वर्षीय हीरा कहती हैं कि उसके दो बच्चे बेटा व बेटी हैं। आंगनबाड़ी हेमलता दीदी उसके घर कई बार आईं। हर बार उसे छोटा परिवार सुखी परिवार के फायदे बताए। पति गांव में ही मजदूरी करता है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की गरज से उसने फैमिली प्लानिंग अपनाने का निर्णय लिया। आंगनबाड़ी दीदी की प्रेरणा से उसने नसबंदी करवा ली।
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जिला लाजिस्टिक मैनेजर जितेश सोनी ने बताया कि यहां 827 योग्य दंपतियों का चयन किया गया है। 430 महिलाओं ने नसबंदी कराई। इनमें दो से ज्यादा बच्चों पर 53.48 फीसदी ने नसबंदी कराई है। दो बच्चों पर 35.48 फीसदी और एक बच्चे पर 10.93 फीसदी महिलाओं ने नसबंदी कराकर परिवार नियोजन का स्थायी साधन अपना लिया है।
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