महराजगंज। जिले में जन समस्याओं के त्वरित निस्तारण के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में फरियादी विभागों का चक्कर लगा रहे हैं। शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में लोगों ने अफसरों को समस्याएं गिनाईं। कुछ मामले तो मौके पर ही निस्तारित कर दिए गए। वहीं कुछ ऐसे मिले, तो लंबे समय से अधिकारियों के दफ्तर कर चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनका दुखड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।
शनिवार को सदर तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान में उप जिलाधिकारी सदर रमेश कुमार ने लोगों की समस्याएं सुनीं। इस बीच हल्की बारिश में भीगते हुए ईटहिया गांव के अताबुद्दीन पहुंचे। वह झोले में एक कागज रखे थे। भीगे हुए कागज को देख रहे थे। उन्होंने बताया कि 11 साल गुजर गए, लेकिन पत्थर नहीं हो रहा है। कई बार शिकायती पत्र दिया, लेकिन अब तक समस्या दूर नहीं हुई। 2013 से विभाग और अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काट रहा हूं।
कुआचाप गांव में जमीन है, जिसका सीमांकन करा कर पत्थर नसब करना है। सोसाबासपर के रहने वाले दिलीप मिश्रा भी फरियाद लेकर पहुंचे। इन्होंने बताया की अपना मकान बनवाया हूं। इनके बगल के ही मकान के आगे पिलर लगाकर तार लगाकर कब्जा कर लिया गया है, जिससे आने-जाने में समस्या हो रही है। दो साल से तहसील का चक्कर लगा रहा हूं। बरियारपुर गांव के छट्ठू प्रसाद भी अर्जी लेकर शिकायत करने आए थे।
उन्होंने बताया कि बारिश में यहां तक पहुंचने में बहुत समस्या हुई। उन्होंने बताया कि बौलिया राजा गांव में आठ डिस्मिल जमीन खरीदा हूं। सीमांकन होने के बाद जमीन मालिक ही कब्जा करने का प्रयास कर रहा है। 2022 से लगातार चक्कर लगा रहा हूं। पकड़ियार बुजुर्ग गांव के रहने वाले त्रिभुवन चौरसिया भी तेजी से सभागार में जाने की कोशिश कर रहे थे। जल्दीबाजी में जाते हुए बोले की जमीन का मामला है। कई बार शिकायत कर चुका हूं। अब तक समस्या दूर नहीं हुई।
सिंदुरिया चौराहे पर सात डिस्मिल जमीन 2012 में 20 लाख 75 हजार रुपये खरीदी थी। जमीन पर कब्जा नहीं होने दे रहे हैं। वर्ष 2012 से लगातार अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर लगा रहा हूं। उन्होंने बताया कि आश्वासन मिला है कि समस्या का समाधान हो जाएगा। मौसम खराब होने के कारण अधिक फरियादी नहीं पहुंच सके थे। जिले की सभी तहसीलों में अधिकारियों ने जनसमस्याओं को सुनकर निस्तारण का प्रयास किया।