ठूठीबारी। शीशगढ़ में आयोजित रामलीला मंचन की तीसरी रात छिपागढ़, नेपाल रामलीला मंडल के कलाकारों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। भगवान श्रीराम का प्राकट्य, उनका नामकरण संस्कार व राक्षसों के आतंक से त्रस्त महर्षि विश्वामित्र का आगमन मंचन के आकर्षण रहे। राम-लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने का दृश्य भी सजीवता से प्रस्तुत किया गया।
लीला की शुरुआत अयोध्यापुरी के प्रसंग से हुई। राजा दशरथ के यहां प्रभु श्री राम के जन्म लेते ही पूरा नगर उत्सव में डूब गया। ढोल-नगाड़ों और बधाइयों के गान के बीच गुरु वशिष्ठ ने नवजात शिशुओं के नामकरण किए। बड़े भाई का नाम राम, दूसरे का भरत, तीसरे का लक्ष्मण और चौथे भाई का नाम शत्रुघ्न रखा गया। बाल्यकाल की इन सुंदर लीलाओं ने दर्शकों का मन मोह लिया।
इस दौरान दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष रविंद्र त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष धीरेंद्र चौधरी, भोला गुप्ता, अरविंद यादव, धनपाल गिरी, बलराम गिरी, राजपाल, राहुल, मुकेश, जयश्री और राममिलन मौजूद रहे।