खीरे की खेती को दिखाते सुरेंद्र निषाद।
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सुरेंद्र खेती में ऐसा रमे कि अब बाहर जाना का मन नहीं
लॉकडाउन में हिमांचल से लौटे घर, तब से परिवार के साथ खेती को बनाया आय का जरिया
महराजगंज। खेती से जुड़कर जिले के किसान अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। ऐसे ही एक नाम सुरेंद्र निषाद का है। पनियरा क्षेत्र के ग्राम हेमछापर (बिचली कोठी) निवासी सुरेंद्र लॉकडाउन में में हिमांचल प्रदेश से घर लौटे, तभी से सब्जियों की खेती कर आय को बढ़ाने में जुटे हैं।
कोविड-19 के बढ़ते प्रभाव के बीच जब हालात बद से बदतर हो गए थे तो अन्य राज्यों में कमाने गए लोग जैसे-तैसे घर लौटे। हालात सामान्य हुए तो अधिकांश लोग लौट गए, लेकिन कुछ लोगों ने गांव में ही रहकर काम धंधा शुरू कर दिया। हेमछापर (बिचली कोठी) के सुरेंद्र ने वर्ष 2020 में खीरे की खेती कर अच्छी आमदनी प्राप्त की तो खेती के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ। इस बार भी उन्होंने 20 डिसमिल में खीरे की खेती की है। गोभी, पत्तागोभी व धनिया आदि की भी खेती कर रखी है।
उनका कहना है कि अब बाहर नहीं जाना है। घर पर रहकर कृषि पर जोर देना है। इस कार्य को बढ़ावा देकर जहां धन की कमी दूर की जा सकती है, वहीं दूसरों को भी प्रगतिशील खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। उद्यान निरीक्षक विकास श्रीनेत ने बताया कि खेती से कृषकों के विकास की अधिक संभावना है। जरूरी है कि खेती से जुड़ा कार्य पूरे मनोयोग से किया जाए।