महराजगंज/परतावल। प्रार्थना सभा की आड़ में धर्म परिवर्तन कराने वाले मुख्य सरगना सुग्रीव की माली हालत बेहद दयनीय थी। 20 साल पहले वह बेरोजगार था और नशे का आदि था।
अक्सर वह गांव के लोगों से वाद विवाद करता रहता था। इसकी वजह से लोग उससे दूरी बनाकर रखते थे। वर्ष 2005 के बाद उसने ईसाई धर्म अपना लिया और लोगों को जोड़ना शुरू कर दिया। सबसे पहले उसने अपनी झोपड़ी में ही प्रार्थना सभा का आयोजन करना आरंभ किया। जैसे-जैसे लोग उससे जुड़ते गए वैसे ही उसकी आमदनी भी बढ़ती गई। इसके बाद उसने पिता का बनाया हुआ पुराना मकान तोड़वाकर आलीशान घर बनवाया।
ग्रामीणों ने बताया कि उसके बातचीत करने का तरीका ऐसा है कि एक बार जो उससे मिल जाता है, उसे वह अपने बस में कर लेता है। यही वजह है कि कम समय में उससे हजारों लोग जुड़ गए। लोगों की भीड़ इतनी बढ़ती गई कि उसका घर भी छोटा पड़ने लगा। लोगों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए उसने गांव के बाहर नहर के बगल में जमीन खरीद ली। उसी जमीन पर निर्माण कराया और प्रार्थना सभा का आयोजन वहीं से करने लगा। स्थानीय लोगों के अनुसार रविवार को वहां सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठी होती है।
अन्य दिनों में भी सामान्य लोगों का आना जाना लगा रहता है। सबसे ज्यादा भीड़ 25 दिसंबर को होती थी। उस दिन रात्रि में विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता था। कार्यक्रम में अगल-बगल के गांव के लोगों के अलावा कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, सिद्धार्थनगर आदि जिले के लोग भी आते थे। यही वजह है कि उसने महज 20 वर्षों में ही झोपड़ी से महल तक का सफर तय कर लिया। वर्तमान में उसके पास तीन लक्जरी कार, बुलेट बाइक व ट्रैक्टर भी है।