‘दबे-कुचले लोगों की आवाज थे प्रोफेसर सक्सेना’
पुण्यतिथि पर जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
महराजगंज। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व भारतीय संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य प्रोफेसर शिब्बन लाल सक्सेना की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज के खेल मैदान के पास बनी समाधि पर शिक्षकों, सिटिजन फोरम के पदाधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वक्ताओं ने कि कि प्रोफेसर सक्सेना दबे-कुचले लोगों की आवाज थे।
उधर, सक्सेना चौक पर जनर्लिस्टस प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने प्रोफेसर सक्सेना की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके सिद्धांतों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। तहसील अध्यक्ष विपिन श्रीवास्तव ने कहा कि प्रोफेसर सक्सेना की वजह से इस क्षेत्र में शिक्षा की ज्योति जली। उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।
सिटिजन फोरम के अध्यक्ष डॉ. रमेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि प्रोफेसर सक्सेना अपने व्यक्तित्व के कारण आज भी सभी के दिलों-दिमाग में हैं। श्रद्धांजलि सभा में गणेश शंकर विद्यार्थी स्मारक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विजय बहादुर सिंह और जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार मिश्र ने कहा कि प्रोफेसर सक्सेना त्याग-तपस्या और बलिदान की प्रतिमूर्ति थे। समाज के पिछड़े वर्ग के लोगों की आवाज थे।
सिटिजन फोरम के महासचिव विमल पांडेय एवं मीडिया प्रभारी डॉ. शांति शरण मिश्र ने कहा कि शिब्बन लाल सक्सेना देश स्तर के नेता थे। वरिष्ठ उपाध्यक्ष कृष्ण मोहन अग्रवाल, सचिव शमशुल हुदा खान, हरिकेश बहादुर सिंह, डॉ. ओम प्रकाश श्रीवास्तव, रामप्रकाश गुप्त ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित किया। इस दौरान राहुल कुमार सिंह, देवेंद्र पाठक, डॉ अशोक कुमार वर्मा, विधि नारायण यादव लेखाकार श्रवण पटेल, जावेद अली सिद्दीकी, संतोष श्रीवास्तव, संतोष पटेल, प्रणय गौतम आदि मौजूद रहे।