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Maharajganj News: मांओं ने कर रखा था जीवित्पुत्रिका का व्रत, इसी दिन बुझ गये दो कुल के चिराग

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- गोरखपुर के हजारीपुर में दूसरों के घरों में चौका-बर्तन का काम करती है किशन की मां, इकलौते बेटे की हो गई मौत
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सिसवा। कोठीभार थानाक्षेत्र के अलग-अलग हादसे में एक-एक बच्चे व किशोर की मौत हो गई। दोनों की माताओं ने बेटों की लंबी उम्र के लिए जीवित्पुत्रिका का व्रत कर रखा था। लेकिन इसी दिन न केवल दोनों मांओं की कोख सूनी हो गई बल्कि उनके घर के चिराग बुझ गए।



कोठीभार थानाक्षेत्र के लोहेपार गांव के खेत में ईंट बनाने किए लिए निकाली गई मिट्टी से बने गड्ढे में शनिवार को 12 वर्षीय किशन की डूबने से न केवल मौत हुई बल्कि एक मां का इकलौता सहारा छिन गया। किशन अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। करीब 10 वर्ष पूर्व उसके पिता अशोक का देहांत हो गया था। पति की मौत के बाद मां पूनम देवी अपनी दो बेटियों सोनी, मोनी व बेटे किशन के पालन-पोषण के लिए गोरखपुर शहर के हजारीपुर क्षेत्र में लोगों के घरों में चौका-बर्तन का काम करती है।
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किशन करीब 15 दिन पहले ही अपनी मौसी मैना और माधुरी देवी के घर लोहेपार आया था। दोनों मौसी लोहेपार में ही रहती हैं। यहां वह मौसी के बेटों रंजीत व देव के साथ स्थानीय परिषदीय विद्यालय में जाकर पढ़ाई करता था। हालांकि जरूरी पहचान पत्र न बन पाने के कारण स्कूल में उसका औपचारिक दाखिला नहीं हो पाया था लेकिन वह नियमित रूप से दोस्तों के साथ पढ़ने जाता था।
शनिवार दोपहर खेत में भरे पानी में डूबने से हुई किशन की मौत की खबर मिलते ही परिजन में चीख-पुकार मच गई। इकलौते भाई के असमय चले जाने से बहनों व मां का रो-रोकर बुरा हाल है। सिसवा अस्पताल पहुंची मां पूनम देवी व मौसी मैना व माधुरी के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो गया।
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जीवित्पुत्रिका का व्रत के दिन बुझ गया घर का इकलौता चिराग



कोठीभार थानाक्षेत्र के खेसरारी देवियापुर निवासी सिंहासन सिंह ने बताया कि उनका बेटा बब्लू सिंह इन दिनों गुजरात में मजदूरी करने के लिए गया था। 16 वर्षीय पौत्र कृष्णा सिंह पुत्र बब्लू सिंह अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। मां मीना ने अपने बेटे कृष्णा की लंबी उम्र के लिए जीवित्पुत्रिका का व्रत कर रखा था। व्रत की परंपरा के तहत ही कृष्णा अपनी मां मीना के साथ शनिवार को छोटी गंडक नदी के छितौनी घाट पर नहाने गया था। इसी दौरान कृष्णा नदी में नहाते वक्त डूब गया। ऐसे में हम सब पर तो वज्रपात हो गया है। अब समझ नहीं आ रहा कि खुद को कैसे संभाले। घटना के बाद से ही बहू को तो संभालना मुश्किल हो गया है। कृष्णा की मौत के बाद से परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
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