लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर के निर्माण में धन का रोड़ा
महराजगंज। क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) योजना के तहत जिले के सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग में बनने वाला लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कार्य धन की कमी से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
चार चरणों में कार्य को कराए जाने के लिए इस कार्य पर वैसे तो कुल 15 करोड़ 88 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं मगर धनराशि न जारी होने की वजह से निर्माण को गति नहीं मिल पा रही है। जिम्मेदार यदि ध्यान दें तो न सिर्फ धनराशि जारी हो जाएगी बल्कि तेंदुओं को संरक्षित किए जाने व उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की भी बेहतर व्यवस्था होगी। सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग में तेंदुओं की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने जिले में लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर बनवाने की योजना बनाई है। सेंटर बनाने के लिए मधवलिया वन विश्राम गृह से पश्चिम तरफ भूमि को चिह्नित करते हुए प्रस्ताव भेजा गया। वर्ष 21-22 में लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर को स्थापित किए जाने के लिए स्वीकृति देते हुए शासन स्तर से कार्यदायी संस्था को भी नामित कर दिया गया मगर अभी तक धनराशि जारी न होने से मामला जस का तस पड़ा हुआ है।
चार चरणों में बांट कर केंद्र पर कराया जाना है कार्य
पहला चरण : लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर में पहले चरण में 495 लाख रुपये से रिहेबिलेशन सेंटर, वेटनरी हॉस्पिटल, टॉयलेट ब्लॉक, बाउंड्रीवाल, ट्यूबवेल, शोकपिट आदि का निर्माण होगा।
दूसरा चरण : पहले चरण का कार्य पूरा किए जाने के बाद दूसरे चरण में 468 लाख रुपये से टाइप टू, थ्री व फोर के आवास, आफिस ब्लॉक, गार्डरूम, पोस्टमार्टम, किचेन यार्ड आदि का निर्माण कराने पर जोर दिया जाएगा।
तीसरा चरण : तीसरे चरण में 478 लाख रुपये से क्वारंटीन सेंटर के साथ ही बाकी कार्यों को तीव्र गति से पूरा कराए जाने का कार्य होगा।
चतुर्थ चरण : चतुर्थ चरण में सेंटर में अन्य सुविधाओं की बहाली होगी। 145 लाख रुपये से सेंटर के लिए इंटरनेट, सड़क, उद्यान व ड्रेनेज आदि का कार्य कराया जाएगा।
सेंटर की स्थापना से यह होगा लाभ
जिम्मेदार इस पर ध्यान दें तो न सिर्फ कार्य शुरू हो जाए बल्कि सेंटर के बनने से जिले के साथ ही गोरखपुर, कुशीनगर, संतकबीरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर व देवरिया में रेस्क्यू किए जाने वाले तेंदुओं का भी यहां व्यवस्थित ढंग से इलाज किया जा सकेगा।
कोट
लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर के लिए धनराशि जारी होना है। उसके प्राप्त होते ही निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।
-टी रंगाराजू, प्रभारी डीएफओ, सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग