महराजगंज। गर्मी शुरू होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। शहर में सफाई व्यवस्था, कर्मियों के वेतन व सामग्री समेत करीब 50 लाख रुपये हर माह खर्च होता है। इसके बाद भी मच्छरों से निजात नहीं मिल पा रहा है। मुख्य मार्ग तो दूर की बात शहर के अंदर की ज्यादातर नालियां साफ नहीं हो पाती हैं। इससे जल व मच्छर जनित रोगों के फैलने की आशंका बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, करीब 60 हजार की आबादी वाले नगर पालिका में 25 मोहल्ले हैं। विस्तारित क्षेत्र में शामिल होने से नगर पालिका सीमा का दायरा भी बढ़ा है। कुछ क्षेत्र में जल निकाली की समुचित व्यवस्था नहीं है। शहर के गांधी नगर मोहल्ले में टूटी नाली का गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है। बदबू के कारण नाक बंद कर गुजरना पड़ता है। नालियों की बेहतर ढंग से सफाई का दावा पालिका कर रही है, लेकिन दावे की हकीकत कूड़े से पटी नालियां बयां कर रहीं हैं। नगर के विभिन्न मार्गों व वार्डों में सफाई व फॉगिंग व्यवस्था की पड़ताल की गई तो नालियां गंदगी से पटी व जाम दिखीं। जगह-जगह पानी में मच्छर पनपते दिखे।
विस्मिल नगर मोहल्ले में चिउरहा जाने वाली सड़क के किनारे की नाली कहीं-कहीं क्षतिग्रस्त है। मोहल्ले में खाली स्थानों में जलभराव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। चिउरहां मार्ग पर बनी नाली भी न सिर्फ गंदगी से पटी मिली, बल्कि उसमें पॉलिथीन व अन्य सामग्री तैरते नजर आए। शहर के सक्सेना चौक पर नाली कूड़े से भरी मिली। वहीं कोतवाली से थोड़ी दूरी पर भी नाली खुली हुई दिखी। उसमें कूड़ा कचरा भरा हुआ दिखा। लोक निर्माण विभाग कार्यालय के सामने नाली को बंद दिखी। कचरे से जाम नाली से बदबू के कारण पास में कोई नहीं रूक रहा था। दूसरी छोर पर मीडिल स्कूल से पहले की नाली भी जाम मिली। आसपास के लोगों ने कहा कि सफाई बेहतर ढंग से नहीं की जा रही है।
संसाधन के साथ कर्मी भी भरपूर
नगर पालिका के पास सफाई के लिए एक बड़ा व एक छोटी पोकलैन मशीन, एक जेसीबी, एक लोडर, दो टाटा 407, चार ट्रैक्टर-ट्राॅली उपलब्ध हैं। फागिंग के लिए तीन मशीन ठीक हालत में हैं। 10 स्प्रे मशीन भी है। नगर पालिका में इस समय सफाई व अन्य कार्य के लिए 361 कर्मियों की तैनाती है। इनमें 15 नियमित, 53 संविदा, 10 दैनिक व 283 ठेके वाले कर्मी हैं। इन कर्मियों के वेतन पर माह में करीब 47 लाख रुपये खर्च होते हैं।