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Maharajganj News: अतिक्रमण और उपेक्षा से विलुप्त होने के कगार तक पहुंची खेसरारी ड्रेन

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सिसवा में ड्रेन सफाई नहीं होने से यह हालत हो गई है।
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खेसरारी ड्रेन का अस्तित्व बचाने के लिए लोगों ने विधायक से लगाई गुहार
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23 मीटर चौड़ी ड्रेन की चौड़ाई अतिक्रमण की वजह से घटकर रह गई है चार मीटर
सिसवा बाजार। क्षेत्र की दशकों पुराना सात किलोमीटर लंबी खेसरारी ड्रेन अतिक्रमण के चलते अपना अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच गया है। सफाई और संरक्षण नहीं होने से विलुप्त हो रही इस ड्रेन को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
क्षेत्र की सबसे पुरानी खेसरारी ड्रेन के अस्तित्व को बचाने के लिए अब सिसवा उपनगर और क्षेत्र के लोगों ने कमर कस ली है। लोगों ने क्षेत्रीय विधायक प्रेमसागर पटेल व उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर ड्रेन की सफाई और उस पर हुए अतिक्रमण को हटाकर उसे संरक्षित करने की गुहार लगाई है। पत्र में कहा गया है कि ड्रेन का रखरखाव नहीं होने तथा लोगों के अतिक्रमण से इसका अस्तित्व मिटने की कगार पर है। मामले को लेकर लोगों ने स्थानीय प्रशासन पर जलस्त्रोतों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। पहले इस ड्रेन की चौड़ाई एक जरीब यानि करीब 23 मीटर थी लेकिन अतिक्रमण की वजह से यह प्राकृतिक जलस्रोत सिकुड़ता जा रहा है। अतिक्रमण के कारण वर्तमान समय में इसकी चौड़ाई घटकर चार मीटर तक पहुंच गई है।
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बरसात में होगा जलभराव
ड्रेन की सफाई नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या बढ़ जाती है। बारिश के पानी को निकासी का रास्ता नहीं मिलता है। इस वजह से जगह-जगह जलभराव हो जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यदि ड्रेन की सफाई कर दी जाए तो बरसात के महीने में इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
वर्जन
कुछ दिनों में बरसात का मौसम शुरू होने वाला है। बरसात में क्षेत्र तथा नगर के नाले-नालियों का पानी इसी ड्रेन से निकलता है। यदि अतिक्रमण को हटाकर सफाई नहीं कराई गई तो इस ड्रेन का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, जिससे नगर और समूचे इलाके में जलभराव की समस्या हमेशा बनी रहेगी।
-ओंकारनाथ तिवारी, लोहेपार
जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं किया जा रहा है। स्थानीय निकाय व प्रशासन की उदासीनता के कारण वर्षों पुरानी इस खेसरारी ड्रेन के अलावा तालाब, पोखर व कुंओं पर लगातार अतिक्रमण जारी है।
-जितेंद्र बहादुर उर्फ नथुनी सिंह, सेनानी नगर
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खेसरारी ड्रेन चिरैयाकोट ताल से निकलकर खेसरारी, सिसवा बुजुर्ग, रायपुर, बैजनाथपुर, रजवल मदरहां, कोठीभार, लोहेपार, चैनपुर, सोनबरसा होते हुए बेलवाघाट में छोटी गंडक में जाकर समाहित होती है। इसकी सफाई होने से लोगों को राहत मिलेगी।
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-लल्ले सिंह, बैजनाथपुर
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ड्रेन की सफाई वर्ष 1977 में तत्कालीन विधायक शारदा प्रसाद जायसवाल ने करवाई थी। अतिक्रमण के चलते यह ड्रेन खेसरारी रायपुर के पास चार मीटर के दायरे में सिमटकर रह गई है। इस प्राकृतिक ड्रेन की पैमाइश कराकर अतिक्रमण मुक्त करने की आवश्यक्ता है।
-राजकुमार यादव, खेसरारी
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