बाढ़ ने ढाया कहर तो मानव धर्म निभाने को आगे आए बरकत, महेश के परिवार को दी शरण, कराया भोजन
जिले में हियां, झरही उर्फ प्यास नदियां हैं उफान पर, बरगदवां, ठूठीबारी और नौतनवां में बढ़ परेशानी
संजय कुमार पांडेय
महराजगंज। विगत कई दिनों से रुक-रुक कर हुई बारिश और नेपाल में मूसलाधार बरसात से जिले की नदिया उफान पर हैं। जनपद की रोहिन, चंदन, भौरहियां, झरही उर्फ प्यास नदियों का पानी गांवों में घुस गए हैं। बरगदवां, ठूठीबारी के साथ ही नौतनवां तहसील क्षेत्र में बाढ़ ने लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
नौतनवां के चकदह गांव के मरचहवां टोले में स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है। यहां शुक्रवार को कई घरों में पानी भर गया। लोगों के पास न तो सर छिपाने के लिए जगह बची और न ही दो रोटी सेंक कर भूख मिटाने की व्यवस्था। अगर कुछ था तो जलभराव और उससे पैदा हुई परेशानी। जिसका मुकाबला ग्रामीण मिलजुल कर करने की कोशिश कर रहे थे। गांव के कुछ लोगों ने उंचे स्थान पर शरण लिया तो किसी ने दूसरे के छत पर रात बिताई। बाढ़ के कहर के बीच गांव के बरकत अली भी दूसरों की मदद को आगे आए और मानवता की ऐसी मिसाल पेश की जो लोगों को सीख दे गई। गांव के महेश के घर में बाढ़ का पानी घुस गया था। उनके पास रहने की जगह नहीं थी। महेश की पत्नी और बेटी परेशान थे। परिवार के पास भोजन बनाने के लिए भी जगह नहीं था। तभी बरकत अली उनके पास पहुंचे। उन्होंने महेश का हौसला बढ़ाया है और पूरे परिवार को अपने घर ले आए। उन्होंने अपने घर में महेश और उनके परिवार के रहने की व्यवस्था की और भोजन कराया। बरकत अली की पत्नी साजरा खातून ने भी महेश के परिवार की मेहमान की तरह सेवा की। सुबह पानी उतरने पर महेश अपनी पत्नी और बच्चे के साथ घर लौट गए। उन्होंने कहा कि मुसीबत के समय में बरकत भाई ने उनकी जो मदद की है, उसे वह कभी भुला नहीं पाएंगे। ऐसे ही लोगों की वजह से इंसानियत जिंदा है। संवाद