लक्ष्मीपुर। नौतनवा तहसील के लक्ष्मीपुर विकास खंड क्षेत्र बनरसिहा कला में उत्खनन चल रहा है। बौद्ध टीले से कुषाणकालीन मृदभांड पुरावशेषों का मिलना जारी है। उत्खनन में दो हजार वर्ष से भी पहले का भंडार कक्ष व रसोईघर मिला है। कुषाण काल से संबंध रखने वाले पुरावशेषों व मृदभांड से ऐसा प्रतीत होता है कि यहां बौद्ध संस्कृति व परंपरा को मानने वाले लोग निवास कर रहे थे, जिनका किन्ही कारणों से यहां से पलायन हो गया। तभी से यह खंडहर में तब्दील पड़ा है।
पुरातत्व अधिकारी रामविनय का कहना है कि कुशल कारीगरों व मजदूरों के साथ पुरातत्व विभाग की टीम बनर्सिहा कला के प्राचीन बौद्ध टीले के विभिन्न स्थानों पर उत्खनन कर रही है। वर्तमान में उत्खनन के दौरान अनाज भंडार कक्ष, रसोई घर, कई प्रकार के मिट्टी के बर्तन और सामग्री मिले हैं। इससे यह प्रतीत हो रहा है कि यहां बहुत ही सुसज्जित और विकसित बौद्ध सभ्यता निवास करती थी। लगातार मिट्टी के बर्तन और कुषाण काल के पुराने ईंट ही निकल ही रहे हैं। इसी तरह से पूरा अवशेष मिलते रहे तो कुछ दिन बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
पुरातत्व अधिकारी रामविनय का कहना है कि वर्तमान में जो मृदभांड मिट्टी के बर्तन और ईंट निकल रहे हैं उनका संबंध कुषाण काल से लग रहा है। उससे इतना तो स्पष्ट हो गया है कि यहां बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग का सुसज्जित नगर था जोकि अब से दो हजार वर्ष पहले का है।
पिछले साल भी की गई थी प्राचीन बौद्ध टीले की खोदाई
प्राचीन बौद्ध टीले की खुदाई पिछले साल भी की गई थी। धनाभाव के कारण 31 मार्च 2023 को काम बंद करना पड़ा था। पिछले वर्ष की खोदाई में भी कुषाण काल के मिट्टी के पात्र व खिलौने, पुरावशेष, मृदभांड आदि मिले थे।