फरेंदा में अंबेडकर तिराहे पर स्वागत सभा करते निर्वाचित विधायक
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फरेंदा। विधानसभा चुनाव में तीसरी बार जीत कर भाजपा ने फरेंदा में चौथी बार परचम लहराया। बजरंग बहादुर सिंह 2012 के चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद लोकायुक्त के जांच में सदस्यता गंवाने के बाद उपचुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। लेकिन 2017 के चुनाव में एक बार फिर जीत दर्ज कर अपनी बुलंदी कायम किया।
फरेंदा विधान सभा में आजादी के बाद से 1952 से लेकर 1967 तक कांग्रेस के गौरीराम गुप्ता ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 1969 के चुनाव में महिला पियारी देवी ने निर्दलीय जीत दर्ज की थी। उसके बाद 1974 में सीपीआई के लक्ष्मीनरायन पांडेय विधायक बन गए। 1977 में सीपीआई से श्यामनरायन तिवारी ने क्षेत्र में कदम रखा और उन्हें जीत मिली।
1980 में फिर श्यामनरायन ने जीत दर्ज कर दूसरी बार क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। जनता पार्टी से 1985 में हर्षवर्धन सिंह ने पहली जीत दर्ज की थी। 1989 व 1991 में कांग्रेस के टिकट पर फिर श्यामनरायन तिवारी जीते। भाजपा के तुलसीराम गौड़ फरेंदा में पहली बार चुनाव मैदान में आए और उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। 1993 में भाजपा ने चौधरी शिवेंद्र को टिकट दिया। उस दौरान पूरे देश में रामलहर थी।
भाजपा प्रत्याशी शिवेंद्र चौधरी ने सीपीएम के विनोद तिवारी को मात्र 50 मतों से हराया था। 1996 के विधान सभा चुनाव में सीपीएम-सपा से विनोद तिवारी ने प्रत्याशी बनाया जिसमें विनोद तिवारी को बड़ी जीत मिली थी। 2002 के चुनाव में कांग्रेस ने श्यामनरायन को एक बार फिर प्रत्याशी बनाया और वह जीत गए। 2007 व 2012 के चुनाव में भाजपा ने बजरंग बहादुर सिंह को टिकट दिया और जीत मिली।
उसी दौरान ठेकेदारी के मामले में बजरंग बहादुर सिंह को लोकायुक्त जांच में अपनी सदस्यता गंवानी पड़ी थी। 2015 में हुए उपचुनाव में बजरंग बहादुर सिंह को 41247 मत मिले लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। एक बार फिर 2017 के चुनाव में भाजपा ने बजरंग बहादुर को टिकट दिया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी को हरा कर तीसरी बार जीत दर्ज की।